‘गाय की माता के रूप में पूजा होती’: गोहत्यारे मुफ्ती अबूजर और सगे भाइयों मुंशाद-आस मोहम्मद को मुजफ्फरनगर कोर्ट ने सुनाई 10-10 साल की सजा, ₹8-8 लाख का जुर्माना भी

मुजफ्फरनगर कोर्ट ने गोहत्या के मामले में मुफ्ती समेत तीन दोषियों को 10-10 साल की जेल और 8-8 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। एडीजे एफटीसी-3 की कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि समाज में कड़ा संदेश जाना चाहिए।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि गाय को गोमाता के रूप में पूजा जाता है और गोहत्या से बहुसंख्यक हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएँ आहत होती हैं। गोवंश सरंक्षण अधिनियम का पालन करना देश के हर नागरिक का दायित्व है और गोकशी कानून का उल्लंघन है। इससे सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारा प्रभावित होता है। इसलिए समाज में कड़ा संदेश जाना चाहिए।

क्या है मामला

ये मामला 24 जनवरी 2021 का है जब तितावी क्षेत्र के बुडिना खुर्द में शाम करीब 8.20 बजे मुंशाद और आस मोहम्मद उर्फ आशू के घर पर छापेमारी हुई थी। ये दोनों भाई हैं और मुफ्ती अबूजर के साथ मिलकर बल्ब जला कर गोवंश काट रहे थे। दरअसल पुलिस को जानकारी मिली थी कि यहाँ अवैध तरीके से गोकशी की जा रही है।

पुलिस ने छापामारी कर वहाँ से गोमाँस और उसे काटने में इस्तेमाल किए गए हथियार बरामद किए। इस मामले में पुलिस ने मुनसाद, अबूजर को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन आस मोहम्मद मौके से फरार हो गया। उसने 15 फरवरी 2021 को कोर्ट में सरेंडर किया। पुलिस रिमांड में आरोपितों ने मान लिया था कि उन्होंने गोकशी की थी। इससे पहले पुलिस ने घटनास्थल से माँस के सेंपल लिए और जाँच के लिए भेज दिया। साथ ही बाकी माँस को गड्ढे में डाल दिया गया।

जाँच के दौरान गोमाँस के सबूत मिले। इसे कोर्ट में पेश किया गया। इस मामले में 4 गवाह पेश किए गए। इस मामले में अब फैसला आया है और कोर्ट ने तीनों आरोपितों को दोषी करार दिया है। तीनों को 10-10 साल जेल की सजा के साथ-साथ 8-8 लाख रुपया जुर्माना लगाया गया है। कोर्ट ने माना कि ऐसा मामलों से सांप्रदायिक सौहार्द को ठेस पहुँचता है।