मोदी सरकार की नीतियों से खात्मे की तरफ माओवादी आतंक, सरेंडर के लिए 3 राज्य के CM को लिखा पत्र: माँगा 15 फरवरी तक का समय, PLGA सप्ताह किया रद्द

भारत में नक्सलवाद के खिलाफ मोदी सरकार की आक्रामक मुहिम ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) को घुटनों पर ला दिया है। संगठन की महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोनल कमेटी ने 22 नवंबर 2025 को एक प्रेस रिलीज जारी कर छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों विष्णुदेव साय, देवेंद्र फडणवीस और मोहन यादव को पत्र लिखा है। इसमें हथियार छोड़कर सरेंडर करने और सरकारी पुनर्वास योजना अपनाने की इच्छा जाहिर की गई है।

MMC जोन के प्रवक्ता ‘अनंत’ ने कहा, “हम सशस्त्र संघर्ष को अस्थायी रूप से रोकने के लिए तैयार हैं। केंद्रीय कमेटी के वरिष्ठ सदस्य कॉमरेड सोनू दादा ने बदलते हालातों के मूल्यांकन के बाद यह फैसला लिया है, जिसे CCM सतीश दादा और CCM चंद्रन्ना समेत अन्य सदस्यों का समर्थन मिला है।

संगठन ने सामूहिक निर्णय प्रक्रिया पूरी करने के लिए 15 फरवरी 2026 तक का समय माँगा है, जो सरकार की 31 मार्च 2026 की माओवाद समाप्ति डेडलाइन के दायरे में है। पत्र में स्पष्ट किया गया, “यह समय दूर-दराज के साथियों तक संदेश पहुँचाने और राय लेने के लिए जरूरी है, क्योंकि हमारे पास आधुनिक कम्युनिकेशन माध्यम नहीं हैं।”

संगठन ने PLGA (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) सप्ताह मनाने से इनकार कर दिया है, जो पहली बार हो रहा है। अनंत ने अपील की, “इस अवधि में तीनों राज्यों की सरकारें संयम बरतें और सुरक्षा बलों के अभियान, मुखबिर नेटवर्क आधारित ऑपरेशंस को रोकें। हम भी सभी गतिविधियाँ स्थगित रखेंगे, ताकि शांति का माहौल बने।”

एक असामान्य माँग में माओवादियों ने सरकार से निवेदन किया कि पत्र को रेडियो पर मुख्य समाचार से पहले प्रसारित किया जाए, क्योंकि “रेडियो ही हमारे साथियों के लिए बाहरी दुनिया से जुड़ने का एकमात्र माध्यम है।” इसके अलावा, जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और यूट्यूब रिपोर्टर्स से मिलने की अनुमति माँगी गई है, ताकि मध्यस्थों के जरिए सरेंडर प्रक्रिया तेज हो। पत्र में कहा गया, “हम जनवादी केंद्रीयता के सिद्धांतों पर चलते हैं, इसलिए सबकी सहमति के बिना कोई फैसला नहीं ले सकते।”

यह पत्र हालिया हिडमा एनकाउंटर के बाद आया है, जिससे संगठन में खलबली मच गई।