नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने 9वीं कक्षा के लिए सोशल साइंस की नई किताब जारी की है। इसमें आजाद भारत के इतिहास के सबसे अहम राजनीतिक घटनाक्रम ‘इमरजेंसी’ को भी जगह दी गई है।
50 साल पहले 1975 में लगे इमरजेंसी की घटनाओं को राजनीतिक चुनौती के तौर पर विस्तार से बताया गया है, क्योंकि उस वक्त नागरिकों के मूल अधिकार को निलंबित कर दिया गया था। नई पुस्तक का नाम ‘Understanding Society: India and Beyond-Part 1’ है। पहले इमरजेंसी पर विस्तार से जानकारी हायर सेकेंडरी (कक्षा 12) में दी जाती थी।
एनसीईआरटी की किताब में बताया गया है कि 70 के दशक की शुरुआत में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के खिलाफ लोगों में काफी गुस्सा भर गया था। देश में बेरोजगारी, महँगाई और गरीबी चरम पर थी और देश भर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे, तो उस वक्त आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए 1975 में इमरजेंसी यानी राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर दिया गया। इस दौरान मौलिक अधिकार सस्पेंड कर दिए गए। नेताओं को गिरफ्तार किया गया और उन्हें नजरबंद कर दिया गया। प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और नागरिकों की आजादी सीमित कर दी गई।
1975-77 तक के बीच के इमरजेंसी के खिलाफ जनआंदोलन में जयप्रकाश नारायण की भूमिका का भी किताब में वर्णन है। इसमें कहा गया है कि लोकनायक के नाम से मशहूर जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में जन आंदोलन हुआ, जिसमें बिहार से गुजरात तक के नागरिकों और छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। इसके बाद किताब में आपातकाल हटाने और चुनाव में कॉन्ग्रेस की करारी हार का जिक्र है।
NCERT के हवाले से हिन्दुस्तान ने बताया है कि यह पाठ पहली बार इसलिए शामिल किया गया है ताकि छात्र-छात्राएँ अपने मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर सजग रहे और इसे समझें। किताब में मीडिया की भूमिका और ‘लोकतंत्र का चौथा स्तंभ’ बताते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में इसकी भूमिका की चर्चा की है।

