एनआईए कोर्ट ने 6 यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक को 30 दिन की एनआईए की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इन्हें एनआईए की हिरासत खत्म होने के बाद पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा के सामने पेश किया गया, जिसके बाद उन्हें 6 मई 2026 तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। 13 मार्च 2026 को एनआईए ने इनलोगों को गिरफ्तार किया था।
#WATCH | Delhi | NIA court sends 6 Ukrainians and one US citizen to 30 days' judicial custody after NIA interrogation.
— ANI (@ANI) April 6, 2026
It is alleged that they came to India on a visa and then entered Mizoram, which is a protected area. Thereafter, they entered Myanmar and contacted ethnic war… pic.twitter.com/OxgJuMZb5J
यह पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है। इन विदेशी नागरिकों पर म्यांमार के विद्रोही समूहों को ड्रोन ट्रेनिंग देने और भारत में वीजा पर आने के बावजूद मिजोरम के प्रतिबंधित जगहों में घुसने और वहाँ से म्यांमार में जाकर उग्रवादी समूहों को ट्रेनिंग देने का आरोप है। ये ग्रुप्स भारत में विद्रोही ग्रुप्स से जुड़े हुए हैं। कहा जा रहा है कि ये लोग यूरोप से भारत के रास्ते ड्रोन्स का बड़ा खेप लेकर आए हैं।
क्या-क्या आरोप हैं
हुरबा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफानकिव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और कामिंस्की विक्टर 6 यूक्रेनी नागरिक हैं, जिन्हें ये लोग मिजोरम के रास्ते म्यांमार जाकर ‘चिन नेशनल आर्मी’ से जुड़े उग्रवादियों को हथियार और ट्रेनिंग दे रहे थे। अमेरिकी नागरिक कोलकाता एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया।
इन विदेशी नागरिकों पर अवैध या आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए आपराधिक साजिश रचने के आरोप में ‘गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम’ (UAPA) की धारा 18 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैन डाइक ‘सन्स ऑफ लिबर्टी इंटरनेशनल’ (SOLI) के संस्थापक हैं, जो एक गैर-लाभकारी सुरक्षा अनुबंध फर्म है।
NIA ने विदेशी नागरिकों की कस्टडी माँगते हुए कोर्ट को बताया था कि आरोपी वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन फिर उन्होंने मिजोरम के प्रतिबंधित क्षेत्र में अवैध तरीके से एंट्री की। वहाँ से सीमा पार कर म्यांमार में घुस गए और भारत विरोधी जातीय संघर्ष में शामिल ग्रुपों से संपर्क साधा। उन्हें कथित तौर पर प्रशिक्षण और उपकरण उपलब्ध कराए।
ये लोग ड्रोन बनाने में माहिर हैं। ये लोग म्यांमार के आतंकी ग्रुप को ड्रोन वॉरफेयर सिखाने आए थे। अगर म्यांमार के आतंकी समूह आधुनिक ड्रोन से लैस हो गए, तो इसका सीधा असर भारत के मिजोरम, मणिपुर और नगालैंड की सुरक्षा पर पड़ेगा।

