दिल्ली में मंगलवार (4 नवंबर 2025) को आयोजित इंडिया डिफेंस कॉन्क्लेव 2025 में आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को आर्थिक रूप से मजबूती मिली है और अब उसे काम करने में ज्यादा आजादी और लचीलापन हासिल हुआ है।
इस दौरान जनरल द्विवेदी ने कहा, “जटिल खतरों से भरी दुनिया में, कोई भी देश अकेले सुरक्षित नहीं रह सकता। साझा डिफेंस इनोवेशन सबसे मजबूत ढाल है। कुछ प्रौद्योगिकियाँ हमें कभी भी आसानी से नहीं मिल जाएँगी। जरूरत है साझा लाभ और स्थानीय नियंत्रण की शर्तों के तहत सहयोग करने की।”’
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब सभी देशों को मिलकर काम करना होगा, क्योंकि रक्षा क्षेत्र में सामूहिक नवाचार (इनोवेशन) ही भविष्य की सबसे मजबूत सुरक्षा कवच बनेगा। जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना अब ड्रोन युद्ध, क्वांटम टेक्नोलॉजी, 6G और स्पेस मिशन जैसे उभरते क्षेत्रों में तेजी से काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि सेना ऐसी तकनीक विकसित कर रही है जो नागरिक और सैन्य दोनों क्षेत्रों में उपयोगी हो सके। उन्होंने कहा कि भविष्य की लड़ाइयाँ मशीनों और तकनीक के सहयोग से लड़ी जाएँगी, इसलिए सेना अब ऑटोमेशन और ‘मैन-अनमैन्ड टीम्स’ की दिशा में बढ़ रही है, जिससे सीमित संसाधनों से अधिक काम किया जा सकेगा।
ATAGS तोप और जोरावर लाइट टैंक जैसी उपलब्धियाँ भारत की आत्मनिर्भरता का प्रमाण: जनरल द्विवेदी
जनरल द्विवेदी ने कहा कि आने वाले समय में जंग विचारों को शक्ति में बदलने की क्षमता पर निर्भर करेगी। जीत इस बात से तय होगी कि कोई देश अपने विचारों को कितनी जल्दी तकनीकी क्षमता और वास्तविक ताकत में बदल पाता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब आत्मनिर्भर बन रहा है और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, ATAGS तोप और जोरावर लाइट टैंक जैसी उपलब्धियाँ इसका प्रमाण हैं। हालाँकि तकनीक और रणनीति कितनी भी आधुनिक क्यों न हो जाएँ, अंत में युद्ध का असली पैमाना जमीन ही होती है और वही जीत का संकेत देती है।
कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर से सेना ने कई अहम बातें सीखी हैं जिन्हें अब नई थिएटर कमान प्रणाली में शामिल किया जाएगा।
इस व्यवस्था के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना एक संयुक्त कमान के रूप में काम करेंगी ताकि किसी भी सुरक्षा चुनौती का तेज और सटीक जवाब दिया जा सके।

