जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले को एक साल बीत गया है। इस हमले में कुल 27 लोगों ने जान गवाईं। पाकिस्तान के आतंकियों ने धर्म पूछकर मासूम पर्यटकों पर गोलियाँ चलाईं। पतियों को उनकी पत्नी के सामने मारा गया और उनसे कहा गया कि ‘जाओ जाकर मोदी को बता दो।’ इस आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान को हमले का मुँहतोड़ जवाब दिया था।
22 अप्रैल 2026 को पहलगाम आतंकी हमले की एक साल की बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन मृतकों को श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “आज ही के दिन पिछले साल पहलगाम में हुए भयानक आतंकी हमले में जिन मासूम लोगों ने अपनी जान गँवाई, उन्हें हम श्रद्धांजलि देते हैं। उन्हें कभी भुलाया नहीं जाएगा। इस दुख की घड़ी में हमारी संवेदनाएँ उन परिवारों के साथ हैं, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।”
Remembering the innocent lives lost in the gruesome Pahalgam terror attack on this day last year. They will never be forgotten. My thoughts are also with the bereaved families as they cope with this loss.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 22, 2026
As a nation, we stand united in grief and resolve. India will never bow to…
उन्होंने आगे लिखा, “एक राष्ट्र के रूप में हम सब इस दुख में एकजुट हैं और मजबूत संकल्प के साथ खड़े हैं। भारत कभी भी आतंक के सामने झुकेगा नहीं। आतंकवादियों की नापाक कोशिशें कभी सफल नहीं होंगी।”
₹3000 के लिए देश से गद्दारी की, नतीजा पहलगाम आतंकी हमला
एक तरफ जहाँ पहलगाम आतंकी हमले से पूरा देश दुख है। दूसरी तरफ खबर सामने आई है कि सिर्फ 3 हजार रुपए के लिए कश्मीर के निवासी दो मुस्लिम युवक परवेज अहमद और बशीर अहमद ने देश से गद्दारी की थी। वो चाहते तो पहलगाम आतंकी हमला नहीं होता।
जाँच एजेंसियों के मुताबिक, हमले से कुछ घंटे पहले करीब दोपहर 12.30 बजे परवेज और बशीर ने बैसरन इलाके में पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकियों को बाड़ के पीछे छिपा हुआ देखा था। तीनों आतंकी पिछली शाम हथियारों के साथ बशीर और परवेज के घर भी गए थे। जहाँ आतंकी 5 घंटे रुके और खाना भी खाया। घर से निकलते समय आतंकियों ने कुछ खाना, कंबल और बर्तन भी पैक किए थे।
यानी बशीर और परवेज को आतंकियों के मंसूबे बेहतर तरीके से पता थे। दोनो को पता था कि इलाके में आतंकी हमला होने वाला है। लेकिन उन्होंने इसकी जानकारी सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी। इसकी जगह दोनों ने आतंकियों से ₹3000 लेकर उनकी मदद की और चुप्पी साधे रहे।
अब ये दोनों उन तीन पाकिस्तानी आतंकियों को शरण देने के आरोप में जेल में हैं। इन आतंकियों की पहचान फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान और हमला अफगाी के रूप में हुई।

