इस्लामाबाद की मस्जिद में लश्कर-ए-तैयबा कमांडर कारी सईद अब्दुल अजीज की अचानक मौत, नमाज पढ़ने जाते समय मस्जिद की गेट पर लड़खड़ाया: मौत की वजह पर सस्पेंस

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के एक वरिष्ठ कमांडर की अचानक मौत हो गई। मृतक की पहचान कारी सईद अब्दुल अजीज के तौर पर हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वह कूबा मस्जिद में नमाज पढ़ने पहुँचा था, लेकिन मस्जिद के गेट पर ही अचानक गिर पड़ा। वहाँ मौजूद लोगों ने उसे संभालने और बचाने की कोशिश की, लेकिन उसकी जान नहीं बच सकी। फिलहाल उसकी मौत की वजह साफ नहीं हो पाई है।

खाना खाने के बाद मस्जिद पहुँचा था लश्कर कमांडर

बताया जा रहा है कि कारी सईद मस्जिद पहुँचने से पहले किसी अनजान जगह पर खाना खाकर आया था। इसके बाद वह कूबा मस्जिद पहुँचा और नमाज की तैयारी करने लगा। वुजू करने के बाद वह अपना बैग लेकर मुख्य नमाज वाली जगह की तरफ बढ़ रहा था। इसी दौरान वह बैठकर जूते उतारने लगा और अचानक जमीन पर गिर गया।

मस्जिद में मौजूद लश्कर के दूसरे लोगों ने उसे उठाया और दूसरी जगह ले जाकर CPR देने की कोशिश की। काफी कोशिश के बाद भी जब उसे होश नहीं आया तो अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अभी तक यह साफ नहीं है कि उसकी मौत किसी बीमारी या अचानक आई मेडिकल इमरजेंसी से हुई या इसके पीछे कोई और वजह थी।

मारे गए आतंकियों के परिवारों की मदद का काम संभालता था

कारी सईद अब्दुल अजीज लश्कर-ए-तैयबा के उस विभाग से जुड़ा था जो भारत में मुठभेड़ों के दौरान मारे गए आतंकियों के परिवारों से संपर्क रखने और उनकी आर्थिक मदद का काम करता था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लश्कर के शोबा-ए-वारसा-ए-शुहदा विभाग की दक्षिण पंजाब यूनिट की जिम्मेदारी संभाल रहा था।

इस विभाग के जरिए मारे गए आतंकियों के परिवारों को आर्थिक सहायता और मासिक पेंशन जैसी मदद दिए जाने की बात सामने आई है। ऐसे में संगठन के भीतर कारी सईद की भूमिका काफी अहम मानी जाती थी।

30 से ज्यादा लश्कर आतंकियों की मौत के दावे के बीच हुई घटना

कारी सईद की मौत ऐसे वक्त हुई है जब लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक दूसरे कमांडर रिजवान हनीफ का वीडियो सामने आया था। इसमें उसने दावा किया था कि पिछले तीन से चार साल में संगठन के 30 से ज्यादा लोग पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मारे गए हैं।

हनीफ ने दावा किया था कि इन लोगों को अज्ञात हमलावरों ने पेशावर, कराची, रावलपिंडी, मुजफ्फराबाद और रावलाकोट जैसे इलाकों में निशाना बनाया। उसने इन घटनाओं के लिए भारतीय खुफिया एजेंसियों पर भी आरोप लगाया था। हनीफ ने इन मौतों के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की, लेकिन अपने आरोपों के समर्थन में कोई सत्यापित या ठोस साक्ष्य नहीं दिया।