POK में पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों का नरसंहार, गोलीबारी में 7 लोगों की मौत: इंटरनेट भी बैन, 9 जून के प्रदर्शन को कुचलने में जुटी फौज

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में एक बार फिर पाकिस्तानी फौज ने प्रदर्शनकारियों पर कहर बरपाया है। लोकल एक्टिविस्ट और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेताओं ने (7 जून 2026) रविवार को रावलकोट में एक व्यक्ति की मौत के बाद उसे दफनाने जा रहे कौम पर फौज और सुरक्षा बलों ने फायरिंग की। इसमें 7 लोगों की मौत हो गई है और 50 से ज्यादा लोग घायल हैं।

दरअसल JAAC ने 9 जून 2026 को पीएम शहबाज शरीफ और फौज के प्रमुख आसिफ मुनीर के खिलाफ पूरे इलाके को बंद करने की योजना बनाई थी। इससे दो दिन पहले से फौज ने कहर बरपाया। JAAC महँगाई, शासन की समस्याओं और PoK के लोगों से किए अपने वादों को पूरा करने में पाकिस्तान की नाकामी के खिलाफ आंदोलन कर रहा है।

टाइम्स नाउ की रिपोर्ट के मुताबिक, इस झगड़े में 200 लोग घायल हुए और कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई, जिनमें चार सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।

कमिश्नर सरदार वहीद के मुताबिक, हिंसा में 3 लोगों की जान चली गई और 40 घायल हो गए। पुलिस ने एक अलग बयान में पुष्टि की कि इस घटना में 4 अधिकारियों की मौत हो गई और 23 अन्य घायल हो गए।

ताजा झड़प पीओके में बरमांग ब्रिज पर हुआ। जाने-माने लोकल एक्टिविस्ट सरदार उमर नज़ीर कश्मीरी को ले जा रही एक कार को सिक्योरिटी वालों ने घेरा। झड़प के दौरान एक गोली उनके कान के पास से निकल गई, जिससे वह बाल-बाल बच गए, लेकिन उनके करीबी शाहजेब हबीब की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इसके बाद हजारों लोग हत्या, शोषण, लगातार हो रहे ज़ुल्म और इलाके पर पाकिस्तान के कसते शिकंजे के खिलाफ सड़कों पर उतर आए।

JAAC अधिकारियों के मुताबिक, शाहजेब हबीब के जनाजे की नमाज के लिए कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल (CMH) के बाहर इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों और मातम मनाने वालों पर सिक्योरिटी अधिकारियों ने गोलियाँ चलाईं। उनका कहना है कि इस कार्रवाई में कम से कम 27 मौतें हुईं।

दूसरी रिपोर्ट्स के मुताबिक, JAAC के एक्टिविस्ट्स ने रविवार को रावलकोट में पाकिस्तानी सरकार और फौज के खिलाफ प्रदर्शन किया। पाकिस्तानी फौजियों और रेंजर्स ने उन पर गोलियाँ चलाईं, जिसमें कम से कम 4 लोग घायल हो गए, जिन्हें मेडिकल मदद के लिए CMH लाया गया।

हबीब की मौत के बाद JAAC ने इंसाफ और जवाबदेही की माँग करते हुए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की योजना बनाई। शहबाज सरकार ने एंटी-टेरर कानूनों के तहत इस ग्रुप पर ‘आतंकवाद में शामिल होने’ और ‘अराजकता फैलाने’ का आरोप लगाया। संगठन इसका भी विरोध कर रहा है।

JAAC के सदस्य शौकत नवाज़ मीर ने कहा, “हम किसी देश, संस्था या व्यक्ति के खिलाफ नहीं हैं — हमारे शांतिपूर्ण संघर्ष को आतंकवाद से जोड़ना बहुत बड़ा ज़ुल्म है। ऊपरवाला ने चाहा तो 9 जून की सुबह एक ऐतिहासिक लंबा विरोध मार्च निकाला जाएगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे एकजुट हों और इसमें बड़ी संख्या में शामिल होकर पाकिस्तानी सरकार को जवाब दें।”

JAAC ने बाहरी लोगों के लिए 12 रिजर्व असेंबली सीटों को भी खत्म करने की माँग की, क्योंकि इससे लोकल अथॉरिटी कमजोर होती है। इसने आरोप लगाया कि इन सीटों से बाहरी लोग पाकिस्तान की बड़ी पॉलिटिकल पार्टियों की तरफ से लोकल असेंबली के फैसलों पर असर डाल सकेंगे। इसने 38-पॉइंट का एजेंडा पेश किया है, जिसमें इलाके के आर्थिक सुधारों की भी माँग की गई है, जैसे कि एनर्जी की लागत कम करना, साथ ही आटा और बिजली पर सब्सिडी देना।

इलाके में कम्युनिकेशन शटडाउन, बॉर्डर पर नाकेबंदी और कई JAAC नेताओं की गिरफ्तारी पर लोगों के गुस्से ने तनाव बढ़ा दिया। News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटेलिजेंस के अंदरूनी सूत्रों ने खुलासा किया कि PoK में हाल ही में कानून-व्यवस्था की हालत बिगड़ने से ‘लोकल लॉ एनफोर्समेंट की गंभीर स्थिति’ पैदा हो गई है। उन्होंने आगे बताया कि पाकिस्तान ‘अभी कई मोर्चों पर गंभीर सुरक्षा खतरों से निपट रहा है।’

इस बीच एक ब्रिटिश पार्लियामेंट्री ग्रुप ने सरकार से PoK में खराब हालात को लेकर सफाई माँगी है। कश्मीर पर ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप के चेयरमैन और ब्रैडफोर्ड ईस्ट के MP इमरान हुसैन ने यूनाइटेड किंगडम के फॉरेन ऑफिस को लिखे एक लेटर में इलाके से आई हालिया रिपोर्टों का जिक्र किया। इसमें कहा गया था कि लॉकडाउन लगाए गए हैं, कम्युनिकेशन रोका गया है ताकि बाहरी दुनिया से पीओके के लोगों का संपर्क न हो सके। ये बातचीत पर असर डालने जैसी पाबंदियाँ हैं।

लगभग 30 सांसदों ने लेटर पर साइन किए, जिसमें सरकार से कहा गया कि वह इलाके में ‘तनाव कम करने और शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी सही डिप्लोमैटिक चैनलों का इस्तेमाल करे।’ इसमें लिखा था, “हम कम्युनिकेशन टूटने, नेटवर्क पर रोक के बीच पाकिस्तानी अधिकारियों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत टूटने से भी चिंतित हैं।”

शांति से इकट्ठा होने का अधिकार, बोलने की आजादी, और कम्युनिकेशन तक पहुँच बुनियादी सिद्धांत हैं, जिसके दम पर जनता का भरोसा सरकार पर बनाया जा सकता है, खास कर पीओके में जारी तनाव के माहौल में। पत्र में ‘शांतिपूर्ण और संयम के साथ सार्थक बातचीत’ की अपील की गई।