ऊर्जा संकट के बीच अँधेरे में डूबा पाकिस्तान, मोबाइल की फ्लैशलाइट से अस्पताल में हो रहे ऑपरेशन: देखें Video

पाकिस्तान की बिगड़ती हालत की एक चौंकाने वाली तस्वीर लाहौर से सामने आई है, जहाँ एक बड़े सरकारी अस्पताल में बिजली गुल होने के बाद डॉक्टरों को मोबाइल फोन की रोशनी में ऑपरेशन करने पर मजबूर होना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक सर्जन खुद सिस्टम की पोल खोलते हुए दिख रहा है।

वह बताता है कि अस्पताल में न बिजली थी और न ही जनरेटर चलाने के लिए ईंधन, जिसके चलते ऑपरेशन थिएटर पूरी तरह अँधेरे में डूब गया। हालात इतने खराब थे कि डॉक्टरों ने मोबाइल टॉर्च जलाकर मरीज की जान बचाने की कोशिश की।

डॉक्टर यह भी आरोप लगाता है कि जहाँ VIP कमरों में जनरेटर से पूरी रोशनी थी तो वहीं आम मरीजों के ऑपरेशन थिएटर अंधेरे में पड़े थे। उसने सवाल उठाया कि क्या गरीब मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं है? डॉक्टर कहता है कि अस्पताल के पास न तेल खरीदने के पैसे हैं, न बिजली बिल चुकाने की क्षमता लेकिन हुक्मरानों की सुविधाओं में कोई कमी नहीं है।

गहराता बिजली संकट: शहरों से गाँव तक अंधेरा

यह घटना कोई अकेली नहीं बल्कि पाकिस्तान के व्यापक बिजली संकट की एक झलक है। देशभर में लंबे समय तक बिजली कटौती आम हो चुकी है। बड़े शहरों में भी 3 से 8 घंटे तक बिजली जा रही है जबकि ग्रामीण इलाकों में यह अवधि 10 से 16 घंटे तक पहुँच रही है। लाहौर, कराची, पेशावर और मुल्तान जैसे शहर सबसे ज्यादा प्रभावित बताए जा रहे हैं।

कई जगह बिना किसी सूचना के बार-बार कटौती हो रही है, जिससे लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। बिजली संकट के पीछे सबसे बड़ी वजह ईंधन की कमी है। पाकिस्तान की बिजली उत्पादन व्यवस्था काफी हद तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर निर्भर है लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात खासतौर पर मिडिल ईस्ट में तनाव के चलते गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है।

विदेशों में व्यस्त नेतृत्व, देश में गहराता संकट

एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर विदेश दौरों और कूटनीतिक गतिविधियों में व्यस्त हैं तो वहीं देश के भीतर आम जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है। सरकार ने बिजली कटौती को ‘माँग’ नियंत्रित करने का उपाय’ बताया है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कहीं ज्यादा गंभीर है।

उद्योग ठप हो रहे हैं, कारोबार प्रभावित है और आम लोगों की जिंदगी अंधेरे में गुजर रही है। लाहौर के अस्पताल की यह घटना सिर्फ एक वीडियो नहीं बल्कि पाकिस्तान की मौजूदा हालत का आईना है। यहाँ एक तरफ VIP सुविधाएँ कायम हैं, वहीं आम लोगों की जिंदगी बुनियादी जरूरतों के अभाव में खतरे में पड़ी है।