शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने वाइट हाउस में बैठक से पहले राष्ट्रपति ट्रंप को लकड़ी का एक बॉक्स दिया। इसमें रंग बिरंगे पत्थर थे। दरअसल ये रेयर मेटल्स थे, जिन्हें ’21वीं सदी का सोना’ कहा जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप को लुभाने की पाकिस्तान की कला अब सबके सामने है।
‘बॉक्स को गिफ्ट कर’ ट्रंप से सौदेबाजी की कोशिश
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख मुनीर इनदिनों अमेरिका की यात्रा पर हैं। वाइट हाउस में ट्रंप और शहबाज-मुनीर की मुलाकात हुई। इस दौरान ‘भविष्य का सोना’ तोहफे में देकर पाकिस्तान ने सौदेबाजी करने की कोशिश की।
मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप के सामने पाक आर्मी चीफ ने एक लकड़ी का बॉक्स खोला। इसे बहुत उत्साहित होकर राष्ट्रपति ट्रंप देख रहे थे। बॉक्स में लाल, हरे नीले पत्थर के टुकड़े थे। ये थे बास्टेनजाइट मोनाजाइट जैसे पत्थर। इनमें रेयर अर्थ मिनरल्स जैसे सेरियम, लैथेनम, नियोडिमियम जैसे रेयर मिनरल्स पाए जाते हैं।
इन धातुओं का इस्तेमाल हाईटेक इंडस्ट्री में होता है। जैसे गाड़ियों के मैग्नेट, मोबाइल फोन के पार्ट्स, मिसाइल तकनीक और दूसरे हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में। यानी कहा जा सकता है कि ये मिनरल्स आधुनिक तकनीक का आधार है और 21वीं सदी का ‘सोना’ है, जिस पर तकनीक निर्भर करेगी। इसलिए ट्रंप को दिये गए पाकिस्तानी तोहफे को ‘डिप्लोमैटिक जेस्चर’ यानी कूटनीतिक रणनीति कहा जा सकता है।
सीएनएन-न्यूज18 को मिली शीर्ष खुफिया जानकारी के अनुसार, मुनीर ने ट्रंप को रेयर अर्थ मेटल और मिनरल्स को लेकर पाकिस्तान की क्षमता के बारे में जानकारी दी। यह क्षेत्र अमेरिकी रक्षा, इलेक्ट्रिक वाहन और सेमीकंडक्टर उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण है।
शरीफ-मुनीर को ट्रंप ने बताया ‘महान नेता’
राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख मनीर को ‘महान नेता’ बताया। उन्होंने पाकिस्तान की खनिज संपदा और उसे निकालने को लेकर रुचि दिखाई। माना जाता है कि इसकी कीमत करीब छह ट्रिलियन डॉलर है।
यह मुलाकात अमेरिकी मेटल कंपनी यूएस स्ट्रैटेजिक मेटल्स (यूएसएसएम) के साथ पाकिस्तान की डील होने के बाद हुई। ये समझौता करीब 500 मिलियन डॉलर की है।
समझौते के तुरंत बाद ट्रंप के साथ पाकिस्तानी नेताओं की बैठक हुई। इस दौरान ट्रंप ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया। सीएनएन के मुताबिक कई विशेषज्ञों ने इसे ‘रणनीतिक हाथ मिलाना’ बताया।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था फिलहाल आईएमएफ के दबाव में है और चीन पहले से ही उसके खनन क्षेत्र में, खासकर बलूचिस्तान की सैंदक और रेको दिक परियोजनाओं में हावी है। ऐसे में पाकिस्तान अब अमेरिका को आकर्षित करने में लगा हुआ है।

