नए साल की शुरुआत के साथ ही पाकिस्तान से जुड़े कई सोशल मीडिया अकाउंट्स ने दावा किया कि पिछले साल हुए संघर्ष के दौरान पंजाब के अमृतसर एयरबेस और ब्यास नदी के पास स्थित ब्रह्मोस मिसाइल सुविधा केंद्र पर हमला हुआ था। इन दावों के समर्थन में पहले और बाद की तस्वीरें साझा की गईं, जिन्हें हमले का सबूत बताया गया। लेकिन स्वतंत्र भू-खुफिया और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) के विशेषज्ञों ने इन तस्वीरों को भ्रामक करार दिया है।
जियो-इंटेलिजेंस विशेषज्ञ डेमियन साइमोन ने गूगल अर्थ की सैटेलाइट इमेजरी के आधार पर स्पष्ट किया कि दोनों ठिकानों पर कोई भी क्षति नहीं दिखती। उन्होंने बताया कि जिन तस्वीरों को हमले का सबूत बताया जा रहा है, वे दरअसल निर्माण से पहले की तस्वीरें हैं या नियमित रखरखाव कार्य को गलत तरीके से तबाही के रूप में दिखाया गया है।

साइमोन ने आगे कहा कि यह वही पुराना नैरेटिव है जिसे पाकिस्तान मई 2025 में भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ के बाद से आगे बढ़ाता रहा है। उस ऑपरेशन में भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में नौ आतंकी शिविरों और 11 अहम पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, जिसके सबूत भारत ने आधिकारिक तौर पर जारी किए थे।
Pakistan resorts to fake news on India, spreads fake images of strike on India bases@Shivanipost with more details on this#Pakistan #India #FakeNews | @Sriya_Kundu pic.twitter.com/ZgGsEXUSDU
— IndiaToday (@IndiaToday) January 1, 2026
इस बीच, पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में पहली बार स्वीकार किया कि भारतीय ड्रोन हमलों से नूर खान एयरबेस को नुकसान पहुँचा था, जिससे पाकिस्तानी दावों की पोल और खुल गई। यह कबूलनामा पाकिस्तान के प्रोपेगैंडा को और कमजोर करता है, क्योंकि पहले वे ऐसे किसी हमले से इनकार करते रहे थे।

