लालू परिवार के भ्रष्टाचार की सुनवाई कर रहे जज के ट्रांसफर की माँग वाली याचिका खारिज, राबड़ी देवी ने जज विशाल गोगने पर लगाए थे ‘पक्षपात’ के आरोप

दिल्ली की एक अदालत ने शुक्रवार (19 दिसंबर 2015) को बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी की जज के ट्रांसफर की माँग वाली याचिका को खारिज कर दिया। इस याचिका में राबड़ी देवी ने अपने, अपने पति और RJD प्रमुख लालू प्रसाद यादव, बेटे तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ चल रहे भ्रष्टाचार के कई मामलों को विशेष जज विशाल गोगने से हटाकर किसी दूसरे जज को सौंपने की माँग की थी।

राउज एवेन्यू कोर्ट के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश भट्ट ने इस मामले में दाखिल ट्रांसफर याचिकाओं को खारिज कर दिया। इन याचिकाओं में विशेष जज विशाल गोगने पर पक्षपात का आरोप लगाया गया था। राबड़ी देवी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनींदर सिंह ने दलील दी कि जज गोगने इन मामलों को जरूरत से ज्यादा तेजी से चला रहे हैं जबकि उनके पास 29 अन्य मामले भी लंबित हैं।

अदालत ने राबड़ी देवी, CBI और अन्य पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे शुक्रवार को सुनाया गया। राबड़ी देवी की ओर से कहा गया कि उन्हें इस मामले की सुनवाई कर रही अदालत पर भरोसा नहीं है। उनके वकील ने कहा कि उन्होंने ‘पक्षपात देखा, महसूस किया गया और झेला है’ और यह जानबूझकर किया गया है।

CBI ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह अदालत और जज की छवि खराब करने और सुनवाई में देरी करने की कोशिश है। CBI ने ट्रांसफर की याचिका को राबड़ी देवी द्वारा अदालत को धोखा देने की गलत नीयत वाली कोशिश बताया है। CBI ने कहा कि यह ना सिर्फ अदालत को बदनाम करने बल्कि स्पेशल जज (विशाल गोगने) को डराने-धमकाने की कोशिश है ताकि न्याय के स्वतंत्र और निष्पक्ष प्रशासन में सीधा दखल दिया जा सके।

CBI की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक डीपी सिंह ने कहा कि जज विशाल गोगने के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और ‘मानहानिकारक’ हैं और जज कानून के मुताबिक ही कार्रवाई कर रहे हैं।

अदालत के निर्देश पर जज गोगने ने बंद लिफाफे में अपना जवाब दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि वे सभी मामलों की सुनवाई पूरी तरह कानून के अनुसार कर रहे हैं और ट्रांसफर याचिका पर अदालत जो भी फैसला ले, उन्हें उस पर कोई आपत्ति नहीं है। याचिका खारिज होने के बाद अब सभी मामले जज विशाल गोगने की अदालत में ही चलते रहेंगे। इसी दिन अदालत ने जमीन के बदले नौकरी मामले के एक केस में आरोप तय करने के मुद्दे पर आदेश सुरक्षित रख लिया है जिस पर फैसला 9 जनवरी 2026 को सुनाया जाएगा।