पीएम मोदी ने कहा कि जम्मू कश्मीर के गौरवशाली गाथा को शेयर कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के बारामूला में, जेहनपोरा में स्थानीय लोगों को बरसों से कुछ ऊँचे-ऊँचे टीले देखते थे थे। किसी को नहीं पता था कि ये क्या है। फिर एक दिन आर्कियोलॉजिस्ट की नजर इन पर पड़ी। जब उन्होंने इस इलाके को ध्यान से देखना शुरू किया, तो ये टीले कुछ अलग लगे।
बारामूला के जेहनपोरा का बौद्ध परिसर बताता है कि जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान कितनी प्राचीन और समृद्ध रही है। यहां के बौद्ध स्तूपों का पता जिस तरह से चला, उसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है!#MannKiBaat pic.twitter.com/rw5UxMXva8
— Narendra Modi (@narendramodi) December 28, 2025
पीएम के कहा कि इन टीलों का वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया। ड्रोन के जरिए ऊपर से तस्वीरें ली गईं, जमीन की मैपिंग की गई। इसके बाद कुछ और हैरान करने वाली बातें सामने आने लगी। पता चला ये टीले प्राकृतिक नहीं हैं यानी इसे बनवाया गया था और ये किसी बड़ी इमारत के अवशेष थे।
Thousands of kilometers away from Kashmir, an old, faded photograph was discovered in the archives of a museum in France. The photograph, taken in Baramulla, showed three Buddhist stupas #MannKiBaat pic.twitter.com/xtPgsC0EqH
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इस रिसर्च के दौरान इन अवशेषों का कनेक्शन फ्रांस से जुड़ा। पीएम मोदी ने बताया कि घाटी से हजारों किलोमीटर दूर एक फ्रेंच म्यूजियम के आर्काइव में तीन स्तूपों वाली एक पुरानी और धुंधली फोटो मिली थी। ये तस्वीर 2023 में कश्मीर विश्वविद्यालय में पुरातत्व के सहायक प्रोफेसर डॉ. मोहम्मद अजमल शाह को मिली थी। इस अनोखे विज़ुअल सबूत की वजह से जेहनपोरा साइट के ऐतिहासिक महत्व को समझने में कामयाबी मिली।
पीएम ने कहा, “फ्रांस के म्यूजियम में आर्काइव की गई आकृतियों में एक धुँधला-सा बहुत पुराना चित्र मिला। बारामूला का यह चित्र था, जिसमें तीन बौद्ध स्तूप नजर आ रहे थे। यही से कश्मीर के गौरवशाली इतिहास का एक और प्रमाण मिला। ये अवशेष दो हजार साल पुराना है। उस वक्त कुषाण वंश का यहाँ शासन था। इन अवशेषों से पता चलता है कि कश्मीर का अतीत कितना गौरवशाली और समृद्ध रहा है।”
PM मोदी ने इतिहास में बौद्ध संस्कृति के विकास और फैलाव में इस इलाके के अहम योगदान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ये नतीजे कश्मीर की शिक्षा, आध्यात्मिकता और अलग-अलग संस्कृतियों के बीच मेलजोल के केंद्र के तौर पर लंबे समय से चली आ रही पहचान को दिखाते हैं। उन्होंने ऐसी विरासत को समझने और उसकी रक्षा करने के महत्व पर जोर दिया, क्योंकि यह सांस्कृतिक गर्व को बढ़ाती है और आज की पीढ़ियों को उनके मूल से जोड़ती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे उदाहरण दिखाते हैं कि कैसे टेक्नोलॉजी, इतिहास और इंटरनेशनल सहयोग मिलकर भारत के अतीत के अनदेखे पहलुओं को वापस ला सकते हैं। फिर उन्होंने यह नतीजा निकाला कि जम्मू और कश्मीर की विरासत लगातार लोगों को प्रेरित करती है और मेलजोल, ज्ञान और साझा इतिहास के बारे में जरूरी सबक सिखाती है, जो आज के समय में भी लागू होते हैं।
बारामूला में गांधार कला शैली के बौद्ध स्तूप मिले
इस कीमती खोज के बारे में OpIndia पहले ही बता चुका है। उत्तरी कश्मीर के बारामूला इलाके के ज़ेहनपोरा में आर्कियोलॉजिस्ट को कुषाण काल के एक खास बौद्ध स्तूपों के बड़े आर्किटेक्चरल अवशेष मिले हैं। इस जगह पर बौद्ध स्तूप, दीवारें, तांबे की कलाकृतियाँ, कुषाण काल के सिरेमिक के टुकड़े, एक शहरी बस्ती कॉम्प्लेक्स (शायद चैत्य और विहार) मिले हैं, और बाद की खुदाई में और भी खुलासे होने की उम्मीद है।
यह प्रोजेक्ट जम्मू और कश्मीर डिपार्टमेंट ऑफ आर्काइव्स, आर्कियोलॉजी एंड म्यूजियम्स (DAAM), सेंटर ऑफ सेंट्रल एशियन स्टडीज और यूनिवर्सिटी ऑफ कश्मीर का मिला-जुला प्रयास है। उनका लक्ष्य पुराने कश्मीर के सांस्कृतिक और धार्मिक बैकग्राउंड के बारे में जानकारी बढ़ाना है।
इन खुदाई से पुराने कश्मीर की अलग अलग सांस्कृतिक विरासत का पता चलता है। यह इलाका हिमालय, सेंट्रल एशिया और देश के मैदानों को जोड़ने वाले ट्रेड रूट के चौराहे पर मौजूद था। अब तक जो मटेरियल कल्चर मिला है, वह एक समृद्ध समुदाय की जानकारी देता है। यह खोज गांधार कला शैली से भी संबंध दर्शाती है। इसकी मजबूत सांस्कृतिक परंपरा और कलाएँ थीं।

