‘सोमनाथ में गर्व, गरिमा और गौरव…’: PM मोदी बोले- हमें मिटाने वाले थक गए, हम आज भी अडिग; गजनी से औरंगजेब तक हुए इतिहास में दफन

पीएम मोदी रविवार (11 जनवरी 2026) को सोमनाथ मंदिर स्वाभिमान पर्व में शामिल हुए। इस दौरान 108 अश्वों के साथ यात्रा निकाली गई। उन्होंने शौर्य सभा को भी संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांताएँ सोमनाथ पर हमला कर रही थीं, तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है, लेकिन वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते थे, उसके नाम में ही सोम अर्थात् अमृत जुड़ा हुआ है। उसमें हलाहल को पीकर भी अमर रहने का विचार जुड़ा है। उसके भीतर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है, जो कल्याणकारक भी है और प्रचंड तांडव: शिव: यह शक्ति का स्रोत भी है

उन्होंने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व, 1000 साल पहले हुए विध्वंस के स्मरण के लिए ही नहीं है। ये पर्व हजार साल की यात्रा का पर्व है। साथ ही, ये हमारे भारत के अस्तित्व और अभिमान का पर्व भी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ” सोमनाथ का इतिहास विनाश और पराजय का इतिहास नहीं है, यह विजय और पुनर्निमाण का है। हमारे पूर्वजों के पराक्रम का है, हमारे पूर्वजों के त्याग और बलिदान का है। आक्रांता आते रहे लेकिन हर युग में सोमनाथ पुन: स्थापित होता रहा, इतनी सदियों का संघर्ष, इतना महान धैर्य, सृजन और पुनर्निमाण का यह जीवट, दुनिया के इतिहास में ऐसा उदाहरण मिलना मुश्किल है।”

इशारों- इशारों में कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण के ठेकेदारों ने कट्टरपंथी ताकतों के सामने घुटने टेक दिए। जब सरदार पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निमाण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, “हमारे धर्म के प्रति ईमानदार कोई भी व्यक्ति ऐसी कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं करेगा, लेकिन तुष्टीकरण के ठेकेदारों ने हमेशा इस कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेके। जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निमाण की शपथ ली तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई। “

इतिसाह के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने कहा कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के यहाँ आने पर भी आपत्ति जताई गई। आज भी हमारे देश में वह ताकतें मौजूद और पूरी तरह सक्रिय हैं, जिन्होंने सोमनाथ पुनर्निमाण का विरोध किया। आज तलवारों की जगह दूसरे कुच्छित तरीके से भारत के खिलाफ षड्यंत्र हो रहे हैं, इसलिए हमें ज्यादा सावधान रहना है, हमें खुद को शक्तिशाली बनाना है, हमें एकजुट रहना है।

पीएम मोदी ने कहा, “अगर किसी देश के पास 100 साल पुरानी विरासत होती है तो वह देश उसे अपनी पहचान बनाकर दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है, वहीं भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्यस्थान है, लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने उनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश की, उस इतिहास को भूलाने के प्रयास हुए।

सोमनाथ को आक्रांताओं से बचाने के लिए दिए गए बलिदानी को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि हम जानते हैं कि सोमनाथ की रक्षा के लिए देश ने कैसे-कैसे बलिदान दिए थे। कितने ही नायकों का इतिहास सोमनाथ मंदिर से जुड़ा है, लेकिन दुर्भाग्य से इसे कभी उतना महत्व नहीं दिया गया, बल्कि आक्रमण के इतिहास को भी कुछ राजनेताओं और इतिहासकारों द्वारा व्हाइटवॉश करने की कोशिश की गई।”

पीएम मोदी ने कहा कि मैंने देखा कल रात 1,000 ड्रोन द्वारा वैदिक गुरुकुलों के 1,000 विद्यार्थियों की उपस्थिति और सोमनाथ के 1,000 वर्षों की गाथा का प्रदर्शन किया गया और आज 108 अश्वों के साथ मंदिर तक शौर्य यात्रा, मंत्रों और भजनों की अद्भुत प्रस्तुति, ये सब कुछ मंत्र-मुग्ध कर देने वाला है।