PM मोदी के ‘मन की बात’ से 2023 से अब तक ₹5 करोड़+ की कमाई, विज्ञापनों पर खर्च शून्य: RTI डेटा में सामने आई बात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में सत्ता में आने के तुरंत बाद ‘मन की बात’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य देशभर के लोगों से सीधे संवाद करना था। इसका मुख्य मकसद भारत के नागरिकों तक अपनी बात पहुँचाना था। जब रेडियो का आकर्षण कम हो रहा था, तब कार्यक्रम ने ऑल इंडिया रेडियों को फिर से लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई।

यह कार्यक्रम काफी लोकप्रिय हुआ और लोग हर बार प्रधानमंत्री की बात सुनने का बेसब्री से इंतजार करने लगे। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों से जुड़ना था, लेकिन समय के साथ इसने प्रसारक के लिए कमाई का जरिया भी बनना शुरू कर दिया। एक RTI के जरिए पता चला है कि जनवरी 2023 से जनवरी 2026 के बीच इस कार्यक्रम ने कितनी कमाई की।

RTI से सामने आए कमाई के आँकड़े

प्रसार भारती द्वारा RTI के जवाब में दी गई जानकारी के अनुसार, एक्टिविस्ट विवेक पांडेय की ओर से दायर आवेदन पर बताया गया कि इस अवधि में कार्यक्रम ने कुल 5.33 करोड़ की कमाई की। साल-दर-साल देखें तो वित्त वर्ष 2022-23 (जनवरी से मार्च 2023) में 16.60 लाख की कमाई हुई।

इसके बाद 2023-24 में यह बढ़कर 1.17 करोड़ हो गई। 2024-25 में यह आँकड़ा 1.63 करोड़ तक पहुँच गया। वहीं 2025-26 में, जनवरी 2026 तक, सबसे ज्यादा 2.36 करोड़ की कमाई दर्ज की गई। ये आँकड़े दिखाते हैं कि समय के साथ इस कार्यक्रम की कमाई लगातार बढ़ रही है, जो इसकी बढ़ती लोकप्रियता और लोगों की भागीदारी को दर्शाता है।

विज्ञापनों पर कोई खर्च नहीं

RTI के एक अन्य हिस्से में विवेक पांडेय ने यह भी पूछा था कि जनवरी 2023 से जनवरी 2026 के बीच ‘मन की बात’ के प्रचार-प्रसार पर सरकार ने प्रिंट, टीवी, रेडियो और इंटरनेट जैसे माध्यमों पर कितना खर्च किया।

इस पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के तहत आने वाले सेंट्रल ब्यूरो ऑफ कम्यूनिकेशन ने जवाब दिया कि इस अवधि में ‘मन की बात’ के विज्ञापनों पर खर्च शून्य रहा। यानी इस कार्यक्रम के प्रचार के लिए किसी भी माध्यम पर कोई पैसा खर्च नहीं किया गया।

ये जानकारी ‘मन की बात’ के बारे में एक खास बात सामने लाती है कि यह सिर्फ करोड़ों लोगों से जुड़ने वाला कार्यक्रम ही नहीं है, बल्कि बिना किसी विज्ञापन खर्च के यह कमाई करने वाला भी है। यह कार्यक्रम अब केवल संवाद का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि एक ऐसा प्रसारण कार्यक्रम बन चुका है जिसका सामाजिक और आर्थिक दोनों ही स्तर पर प्रभाव दिखाई देता है।