ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के जनाजे को लेकर शिया मुल्क में नाराजगी देखने को मिल रही है। कई नागरिकों ने दावा किया है कि सरकार और प्रशासन व्यवसायों, सरकारी संस्थानों तथा कर्मचारियों पर जनाजे की व्यवस्थाओं के लिए धन, संसाधन और उपस्थिति सुनिश्चित करने का दबाव बना रहे हैं।
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, लोगों का कहना है कि महँगाई, गरीबी और आर्थिक संकट से जूझ रहे देश में जनाजे पर भारी खर्च जनता की परेशानियों को और बढ़ा रहा है।
जनाजे की तैयारियों के लिए कारोबारियों और कर्मचारियों पर दबाव के आरोप
ईरान इंटरनेशनल को देशभर से भेजे गए संदेशों में दावा किया गया है कि कार्यक्रमों की तैयारियों के लिए बड़े पैमाने पर संसाधन जुटाए जा रहे हैं। एक बस टर्मिनल कर्मचारी ने आरोप लगाया कि उन्हें तीन दिनों तक टिकट बेचने से रोक दिया गया है और टर्मिनल के भीतर सभी दुकानों को बंद रखने का आदेश दिया गया है, जबकि किराए में कोई राहत नहीं दी जा रही।
सेमनान से भेजे गए एक अन्य संदेश में कहा गया कि औद्योगिक क्षेत्रों की कंपनियों को शोक यात्रा के मार्ग पर सूप, चाय, जूस और खजूर वितरण के लिए सेवा केंद्र लगाने तथा पूरा खर्च स्वयं उठाने का सरकारी आदेश दिया गया है।
वहीं, तेहरान से आए संदेश में दावा किया गया कि इस्लामिक रिपब्लिक और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कंपनियों को जनाजे के लिए स्टॉल और भोजन की व्यवस्था हेतु बड़ी रकम देने के लिए मजबूर किया है। इसके अलावा सिविल रजिस्ट्रेशन संगठन के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि समारोह में भाग लेने के लिए उन्हें 20-20 किलोग्राम चावल देने की पेशकश की गई।
महँगाई और गरीबी के बीच बढ़ा जनाक्रोश, विरोध के नए तरीके भी सामने आए
जनाजे के खर्च को लेकर लोगों का गुस्सा इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि देश पहले से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। स्वतंत्र आँकलनों के अनुसार ईरान में औसत मासिक आय लगभग 150 डॉलर है, जबकि एक परिवार के लिए अनुमानित गरीबी रेखा करीब 350 डॉलर प्रति माह मानी जाती है।
ऐसे में बड़ी आबादी अपनी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष कर रही है। कई नागरिकों ने आरोप लगाया कि सरकार जनता की परेशानियों को नजरअंदाज कर राष्ट्रीय संसाधनों को जनाजे के कार्यक्रम पर खर्च कर रही है। एक संदेश में कहा गया कि लोग महंगाई और गरीबी से तबाह हैं, लेकिन सत्ता में बैठे लोग जनाजे पर देश की संपत्ति खर्च कर रहे हैं।

