पंजाब में हाल ही में बने संगठन, ‘पंजाब बचाओ मोर्चा’ ने राज्य में ‘चमत्कारिक इलाज’ के नाम पर हो रहे कथित अवैध धर्मांतरण के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का ऐलान किया है। 12 नवंबर 2025 को मोर्चा के अध्यक्ष तेजस्वी मिन्हास ने राज्य सरकार से एंटी-कन्वर्जन बिल (धर्मांतरण विरोधी कानून) लागू करने की माँग की है।
₹2 लाख का इनाम और धर्मांतरण विरोधी कानून की माँग
तेजस्वी मिन्हास का कहना है कि ऐसा बिल ‘खुद को भगवान बताने वाले बाबाओं और पादरियों’ द्वारा किए जा रहे बड़े पैमाने पर, गैर-कानूनी धर्मांतरण को रोकेगा। इसके अलावा, संगठन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए घोषणा की है कि जो भी व्यक्ति अवैध धर्मांतरण का पुख्ता सबूत देगा, उसकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उसे ₹2 लाख का नकद इनाम भी दिया जाएगा।
65,000 पादरियों पर लालच देकर धर्म परिवर्तन का आरोप
मिन्हास के अनुसार, यह समूह जल्द ही इस मुद्दे पर जनहित याचिकाएँ (PIL) दाखिल करेगा और राज्यपाल, मुख्यमंत्री तथा पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को मेमोरैंडम भी भेजेगा। जालंधर के पंजाब प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मिन्हास, अन्य कार्यकर्ताओं और विशेषज्ञों में प्रो एमपी सिंह और सुखविंदर सिंह लल्ली शामिल थे। उन्होंने कहा कि राज्य में करीब 65,000 पादरी सक्रिय हैं, जो लोगों को लालच देकर, दबाव डालकर और झूठे ‘चमत्कारी इलाज’ दिखाकर धर्म परिवर्तन करा रहे हैं। वे दावा करते हैं कि यह गतिविधियाँ ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) एक्ट 1954 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं का उल्लंघन करती हैं।
आबादी में वृद्धि और विदेशी फंडिंग पर सवाल
पार्टी का कहना है कि सरकार चमत्कारी इलाज के नाम पर होने वाली गतिविधियों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही, जबकि ये तरीके न सिर्फ कानून के खिलाफ हैं बल्कि संविधान की भावना के भी विपरीत जाते हैं। संगठन के नेताओं ने दावा किया कि 2011 की जनगणना में ईसाई आबादी 1.26% (लगभग 3.48 लाख) थी, लेकिन उनके अनुसार पिछले दस सालों में यह संख्या काफी बढ़ी है, जो बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन की ओर इशारा करती है।
वक्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ विदेशी नागरिक, जो भारत में नौकरी या पर्यटन वीजा पर आते हैं, वे भी धर्म परिवर्तन की गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं, जबकि ऐसे काम के लिए मिशनरी वीजा जरूरी होता है। उनका आरोप है कि कई विदेशी लोग कानून में जरूरी इस वीजा को लिए बिना ही धार्मिक प्रचार व धर्म परिवर्तन से जुड़े काम कर रहे हैं।
संगठन ने यह भी चिंता जताई कि कुछ जगहों पर लाउडस्पीकर और विज्ञापनों का इस्तेमाल इस तरह हो रहा है, जिससे लोगों की शांति भंग होती है और दूसरों की धार्मिक भावनाओं पर असर पड़ता है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कई जगह खेती की जमीन को डेरे बनाने के लिए बदला जा रहा है, जिस पर रोक लगनी चाहिए।
‘डॉक्यूमेंट ईसाई’ का आरक्षण खत्म करने की माँग
समूह ने माँग की कि धार्मिक जनगणना को अपडेट किया जाए, हिंदू और सिख धर्म से परिवर्तित लोगों को मिलने वाले आरक्षण लाभ वापस लिए जाएँ, और ऐसे धार्मिक समूहों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग की CBI और RAW से जाँच कराई जाए।
पार्टी के एक सदस्य ने कहा कि वे ‘चमत्कारी इलाज’ पर प्रतिबंध लगाने और उन लोगों के लिए आरक्षण लाभ समाप्त करने के लिए भी PIL दायर करेंगे, जो व्यवहार में तो ईसाई हैं, लेकिन दस्तावेजों में अपना धर्म नहीं बदलते।

