राजस्थान पुलिस की CID (इंटेलिजेंस) ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करने वाले फंडिंग एजेंट रफीक चंद शेख को गिरफ्तार किया है। जाँच में सामने आया कि रफीक पिछले 4 साल से पाकिस्तानी ISI हैंडलर के निर्देश पर भारत में जासूसी नेटवर्क से जुड़े लोगों तक पैसे पहुँचाने का काम कर रहा था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान से आने वाली रकम अलग-अलग बैंक खातों के जरिए भेजी जाती थी ताकि उस पर किसी को शक न हो। इस मामले में अब कई और लोगों की भूमिका भी जाँच के दायरे में है।
राजस्थान सीआईडी (इंटेलिजेंस) काफी समय से पाकिस्तान से जुड़े जासूसी और फंडिंग नेटवर्क पर नजर रख रही थी। जाँच के दौरान एजेंसियों को ऐसे वित्तीय लेनदेन की जानकारी मिली, जिनका संबंध भारत में सक्रिय संदिग्ध लोगों से था। इसके बाद बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल रिकॉर्ड की जाँच शुरू की गई।
जाँच आगे बढ़ी तो एजेंसियों को पता चला कि इस पूरे नेटवर्क में रफीक चंद शेख अहम भूमिका निभा रहा है। इसके बाद CID की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उससे लगातार पूछताछ की जा रही है।
दूसरे नामों पर खुलवाए कई बैंक खाते
शुरुआती जाँच में सामने आया कि रफीक चंद शेख की पहचान सोशल मीडिया के जरिए एक पाकिस्तानी ISI हैंडलर से हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और फिर हैंडलर ने उसे भारत में पैसों के लेनदेन का काम सौंप दिया। इसके बदले रफीक को भी कमीशन मिलता था।
जाँच एजेंसियों के अनुसार रफीक ने केवल अपने नाम से ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों के नाम पर भी कई बैंक खाते खुलवाए। पाकिस्तान से आने वाली रकम पहले इन खातों में भेजी जाती थी। इसके बाद वह रकम अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी, ताकि असली स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो जाए।
पुलिस का कहना है कि यह पैसा उन लोगों तक पहुँचाया जाता था, जो पाकिस्तान के लिए जासूसी करने या संवेदनशील जानकारी जुटाने के आरोपों में जाँच के दायरे में हैं। एजेंसियाँ यह भी पता लगा रही हैं कि इस नेटवर्क के जरिए कुल कितनी रकम भारत भेजी गई।
असम और जैसलमेर से पकड़े गए आतंकियों को पहुँचाए पैसे
इस मामले की जाँच में सबसे बड़ा सुराग इसी साल जनवरी में मिला था। उस समय राजस्थान CID ने जैसलमेर के ई-मित्र संचालक झबराराम और असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात एमटीएस कर्मचारी सुमित कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों पर भारतीय सेना की संवेदनशील और गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजने का आरोप है।
जाँच के दौरान एजेंसियों ने पाया कि दोनों आरोपितों के खातों में संदिग्ध तरीके से पैसे आए थे। जब उन पैसों की पूरी जाँच की गई तो रकम की कड़ी रफीक चंद शेख तक पहुँची। इसके बाद CID ने उसके खिलाफ सबूत जुटाए और फिर कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया।
CID अब रफीक के मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक खातों, एटीएम कार्ड, डिजिटल वॉलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जाँच कर रही है। उसके कॉल रिकॉर्ड, चैट, सोशल मीडिया संपर्क और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन का भी विश्लेषण किया जा रहा है। यह पता लगाया जा रहा है कि उसने पाकिस्तान में किस-किस व्यक्ति से संपर्क रखा और भारत में किन लोगों के साथ मिलकर काम किया।

