प्रोपेगेंडाई पत्रकार रवीश कुमार एक बार फिर अपने अजीब बयानों को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उन्होंने ट्रेनों पर होने वाली पत्थरबाजी की घटनाओं को रोकने के लिए ऐसे सुझाव दिए हैं जिन्हें सुनकर हर कोई हैरान है।
शनिवार (14 मार्च 2026) को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जवाब में रवीश ने कहा कि पत्थर फेंकने वालों को सजा देने के बजाय सरकार को उनकी मानसिक स्थिति की जाँच करानी चाहिए। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी तर्क दे दिया कि अगर कोई गरीब ट्रेन में सफर नहीं कर पा रहा, तो उसे मुफ्त में सफर कराया जाए ताकि वह गुस्से में पत्थर न फेंके।
पत्थरबाजों के लिए माँगा ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’
रवीश कुमार ने मुंबई के पास ‘साईनगर शिरडी वंदे भारत एक्सप्रेस’ पर हुई पत्थरबाजी की घटना पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि हमें यह समझने की जरूरत है कि लोग पत्थर क्यों फेंक रहे हैं। उन्होंने रेल मंत्रालय को सुझाव दिया कि वह डेटा जारी करे कि रोजाना कितनी पत्थरबाजी होती है और उन रास्तों पर जाकर अभियान चलाए जहाँ लोग पत्थर फेंकते हैं। लोगों का कहना है कि रवीश एक गंभीर अपराध को केवल ‘मनोवैज्ञानिक समस्या’ बताकर दोषियों का बचाव करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुझे लगता है रेलगाड़ी पर पत्थर मारे जाने की घटना को समझने की ज़रूरत है। ऐसा क्या है कि लोग पत्थर मारते हैं। क्या यह कोई मनोवैज्ञानिक समस्या है? रेलवे को डेटा बताना चाहिए कि हर दिन ऐसी कितनी घटनाएँ रिपोर्ट होती हैं और जिन रास्तों से रेल गुजरती है वहां कैंपेन चले कि पत्थर न मारें।… https://t.co/SwHabq5GrJ
— ravish kumar (@ravish_journo) March 14, 2026
‘टिकट के पैसे नहीं तो कराओ मुफ्त सैर’
रवीश कुमार ने अपने पोस्ट में सबसे अजीब तर्क यह दिया कि जो लोग वंदे भारत जैसी ट्रेनों में टिकट नहीं खरीद पाते, वे हताशा और गुस्से में पत्थर फेंकते हैं। उन्होंने समाधान बताते हुए कहा, “अगर किसी के पास पैसे नहीं हैं, तो वह स्टेशन मास्टर से मिले और स्टेशन मास्टर उसे दो स्टेशन तक मुफ्त सफर कराए।” रवीश के मुताबिक, ऐसा करने से स्थानीय लोगों के मन में ट्रेन पर पत्थर फेंकने की इच्छा खत्म हो जाएगी।
अपराध को बताया ‘हताशा’, सोशल मीडिया पर घिरे
जिस वीडियो पर रवीश ने ये बातें कहीं, उसमें एक 23 साल का युवक साफ स्वीकार कर रहा है कि उसने नशे की हालत में वंदे भारत की खिड़कियाँ तोड़ीं। कानून के मुताबिक सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचाना एक बड़ा जुर्म है, लेकिन रवीश कुमार इसे एक ‘स्टडी’ का विषय बता रहे हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे ‘फालतू ज्ञान’ बता रहे हैं और सवाल पूछ रहे हैं कि क्या अब हर अपराधी की हताशा दूर करने के लिए उसे तोहफे दिए जाएँगे?

