अमेरिका को लेकर भारत ने बदली रणनीति, RBI ने US ट्रेजरी बॉन्ड से निकाली 21% राशि: स्वर्ण भंडार में किया बंपर निवेश, क्षमता 880 मीट्रिक टन के पार

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल के महीनों में अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी घटाई है और इसके साथ ही सोने के भंडार में लगातार बढ़ोतरी की है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पोर्टफोलियो के संतुलन को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आँकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 के अंत तक RBI के पास 190 अरब डॉलर के अमेरिकी बॉन्ड थे, जबकि एक साल पहले यह आँकड़ा 241.4 अरब डॉलर था। यानी इस अवधि में करीब 50.7 अरब डॉलर की कमी दर्ज की गई।

पूरे 2025 में भारत ने अमेरिकी ट्रेजरी होल्डिंग्स में लगभग 21% की कटौती की है। यह बदलाव ऐसे समय में हुआ है जब 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड 4% से बढ़कर 4.8% तक पहुँच चुकी है।

सोने के भंडार में तेज बढ़ोतरी

दूसरी ओर RBI ने सोने की खरीद में आक्रामक रुख अपनाया है। मौजूदा समय में भारत का स्वर्ण भंडार लगभग 880.18 मीट्रिक टन तक पहुँच गया है। सोना अब भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 13.6% हिस्सा बन चुका है, जबकि पिछले साल यह आँकड़ा 9.3% था।

भारत का कुल विदेशी मुद्रा भंडार करीब 687 अरब डॉलर का है। यह रुझान केवल भारत तक सीमित नहीं है, चीन, ब्राजील और सऊदी अरब जैसे देश भी हाल के क्वार्टरों में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, जिसे डॉलर में संभावित अस्थिरता और अमेरिका के बढ़ते कर्ज और ब्याज बोझ से बचाव के तौर पर देखा जा रहा है।

हालाँकि इसी दौरान ब्रिटेन, बेल्जियम, जापान, कनाडा और यूएई जैसे देशों ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाई है। विशेषज्ञों के अनुसार, RBI का यह कदम वैश्विक जोखिमों के बीच अपने विदेशी मुद्रा पोर्टफोलियो को संतुलित करने और दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने की रणनीति का हिस्सा है।