मध्य प्रदेश के सीहोर जिले के ग्रामीण और जनजातीय अंचलों में धर्मांतरण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसी बीच पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पिछले तीन महीनों से जनजातीयों को नौकरी और एक-एक लाख रुपए का प्रलोभन देकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दबाव बना रहा था।
ग्रामीणों की शिकायत के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए छह आरोपितों को गिरफ्तार किया है और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2021 के तहत मामला दर्ज किया है।
धर्मांतरण का प्रलोभन: प्रार्थना सभाओं के नाम पर बढ़ाया गया दबाव
बिलकिसगंज थाना क्षेत्र के जनजातीय इलाकों में लगातार प्रार्थना सभाएँ आयोजित की जा रही थीं, जहाँ ग्रामीणों को प्रेरित करने का दावा किया जाता था। लेकिन समय के साथ यह प्रेरणा जोर-जबरदस्ती और पैसों के लालच में बदल गई।
रेहटी के ग्राम भीलपाटी और खजुरी में रहने वाले कुछ लोगों द्वारा रात में गुप्त सभाएँ की जाती थीं, जिनमें ईसा मसीह की फोटो, बाइबल और आर्थिक सहायता का वादा दिखाकर लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर किया जा रहा था। आरोपितों ने ग्रामीणों को एक लाख रुपए देने और नौकरी लगवाने जैसे लालच भी दिए।
ग्रामीणों ने पुलिस को दी सूचना, छापेमारी में मिला धार्मिक साहित्य
ग्राम वीरपुर के लखन, सीताराम, रमेश और रायसिंह बारेला ने सामूहिक रूप से पुलिस को लिखित शिकायत दी कि तीन महीनों से आरोपित लगातार उनके गाँव में आकर दबाव डाल रहे हैं। 9 दिसंबर 2025 की रात उन्हें फिर से जबरन सभा में बुलाया गया, जिसके बाद ग्रामीणों ने 112 डायल कर पुलिस को सूचना दी।
मौके पर पहुँची पुलिस ने संदिग्ध गतिविधियों की पुष्टि की और बिलकिसगंज थाना प्रभारी संदीप मीणा के निर्देश पर छापामार कार्रवाई की। पुलिस ने मौके से बाइबल की प्रतियाँ, धार्मिक साहित्य और धर्म परिवर्तन में उपयोग होने वाली सामग्रियाँ जब्त कीं।
छह आरोपित मुकेश बारेला, लखन बारेला, सीताराम बारेला, रेम सिंह बारेला, कुशमा बारेला और बीना बारेला को हिरासत में लिया गया और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की धारा 3/5 के तहत मामला दर्ज किया गया।
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें लंबे समय से आर्थिक लालच और धार्मिक दबाव झेलना पड़ रहा था। कई बार सभा में जाने के लिए जबरदस्ती भी की जाती थी। उनका कहना है कि यदि पुलिस समय पर नहीं आती तो यह गिरोह और भी कई लोगों को अपने जाल में फँसा सकता था।

