नहीं रहे प्रख्यात संविधान एक्सपर्ट सुभाष कश्यप, 97 वर्ष की उम्र में ली आखिरी साँस

लोकसभा के पूर्व महासचिव और प्रख्यात संविधान एक्सपर्ट डॉ सुभाष कश्यप का गुरुवार (4 जून 2026) को निधन हो गया है। 97 वर्ष के कश्यप ने कार्डियो-पल्मोनरी अरेस्ट की वजह से दम तोड़ दिया। सुभाष कश्यप ने 1953 में संसद सचिवालय से अपना कार्यकाल शुरू किया और करीब 37 साल तक संसद से जुड़े रहे। उन्होंने 7वीं, 8वीं और 9वीं लोकसभा में संसदीय कार्यों के संचालन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के बिजनौर में जन्मे कश्यप ने 100 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं और उनके 500 से अधिक शोध लेख भी प्रकाशित हुए। कश्यप ने किशोरावस्था में आजादी के लिए बिजनौर-मेरठ में स्थानीय स्तर पर छात्रों के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय, अमेरिका, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड में उच्च शिक्षा और व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया थी।

उन्हें 2015 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। वे भारत सरकार के लिए पंचायती राज कानूनों और संस्थाओं के मानद संवैधानिक सलाहकार भी रहे हैं। साथ ही, कश्यप लंबे वक्त तक भारतीय राष्ट्रीय बार एसोसिएशन (INBA) के अध्यक्ष भी रहे। कश्यप ने जिनेवा स्थित इंटरनेशनल सेंटर फॉर पार्लियामेंट्री डॉक्यूमेंटेशन (IPU) का भी नेतृत्व किया था।

जीवन के अंतिम वर्षों में वह दिल्ली स्थित सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR) में मानद शोध प्रोफेसर के रूप में जुड़े हुए थे। वह संविधान के कामकाज की समीक्षा के लिए गठित राष्ट्रीय आयोग के सदस्य रहे और इसकी ड्राफ्टिंग व संपादकीय समिति के अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली। ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ की संभावनाओं पर विचार करने के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति के प्रमुख सदस्यों में भी उनका नाम शामिल था।