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नरेंद्र मोदी स्टेडियम से SVP स्पोर्ट्स एन्क्लेव तक: समझें भारत का स्पोर्ट्स कैपिटल बनने की दिशा में कैसे आगे बढ़ रहा है अहमदाबाद

अहमदाबाद को भारत की 'स्पोर्ट्स कैपिटल' बनाने के विजन का सबसे बड़ा प्रतीक मोटेरा का नरेंद्र मोदी स्टेडियम है, जो एक लाख से अधिक क्षमता के साथ दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है।शहर में खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नगर निगम 10 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 27 प्लेग्राउंड्स विकसित कर रहा है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार (28 मई 2026) को अहमदाबाद में 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स, 2036 ओलंपिक्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की तैयारियों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर इस बात पर जोर दिया कि अहमदाबाद को भारत की स्पोर्ट्स कैपिटल के रूप में विकसित करने के लिए तेजी से काम हो रहा है। आमतौर पर लोग ऐसे बयानों को राजनीतिक भाषण का हिस्सा मानकर भूल जाते हैं। लेकिन अहमदाबाद के मामले में बात थोड़ी अलग है, क्योंकि यहां सिर्फ दावे नहीं हैं, बल्कि उनके पीछे दिखने वाले सबूत भी हैं।

मोटेरा का विश्वप्रसिद्ध स्टेडियम है, नारनपुरा का विशाल स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है, शहर भर में बन रहे नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स हैं, स्पोर्ट्स एन्क्लेव है, खेल महाकुंभ है, नेशनल गेम्स हैं और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा ओलंपिक्स को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा इन्फ्रास्ट्रक्चर है। इस सब को मिलाकर जब देखा जाता है, तब समझ में आता है कि अहमदाबाद में सिर्फ सीमित स्पोर्ट्स प्रोजेक्ट्स खड़े नहीं हो रहे हैं, बल्कि खेलों को केंद्र में रखकर शहर के लिए एक नई पहचान बनाने की कोशिश हो रही है।

अहमदाबाद का इतिहास देखा जाए तो शहर ने समय-समय पर अपनी पहचान बदलने की अनोखी क्षमता दिखाई है। एक समय था जब इसे ‘भारत का मैनचेस्टर’ कहा जाता था। कपड़ा मिलें इसकी अर्थव्यवस्था का आधार थीं। फिर धीरे-धीरे शहर ने व्यापार, उद्योग, वित्तीय गतिविधियों और आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बनाई। गुजरात की आर्थिक राजधानी के रूप में अहमदाबाद का स्थान मजबूत होता गया।

लेकिन अब शहर के लिए एक और नई पहचान बनाने की प्रक्रिया चल रही है। एक ऐसी पहचान, जो सिर्फ व्यापार या उद्योग तक सीमित नहीं है, बल्कि खेल, युवा शक्ति, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और वैश्विक स्तर की सुविधाओं से जुड़ी है। आज अगर पिछले पांच-छह वर्षों के विकास कार्यों को एक साथ रखा जाए, तो साफ दिखता है कि अहमदाबाद को केवल एक और मेट्रो शहर के रूप में नहीं, बल्कि खेलों को केंद्र में रखकर विकसित किए जा रहे एक विशिष्ट शहर के रूप में देखा जा रहा है।

अहमदाबाद में कैसे हुई स्पोर्ट्स सिटी की शुरुआत

अहमदाबाद के स्पोर्ट्स कैपिटल नैरेटिव की बात करें तो 2022 एक महत्वपूर्ण साल के रूप में सामने आता है। गुजरात में नेशनल गेम्स का आयोजन हुआ और पूरे राज्य में खेलों को लेकर नया उत्साह देखने को मिला। इसी कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा था कि अहमदाबाद जल्द ही दुनिया की सबसे बड़ी स्पोर्ट्स सिटी बनेगा। उस समय कई लोगों ने इस बयान को एक महत्वाकांक्षी दावे के रूप में देखा। लेकिन इसके बाद जिस गति से प्रोजेक्ट्स आगे बढ़े, उसने इस बयान को एक अलग ही मायने दे दिए।

नेशनल गेम्स ने एक महत्वपूर्ण बात साफ कर दी। बड़े खेल आयोजन सिर्फ स्टेडियमों से नहीं होते। इसके लिए खिलाड़ियों, ट्रेनिंग, आवास, परिवहन, सहायक सुविधाओं और शहरव्यापी इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत होती है। अहमदाबाद में उस समय पहले से चल रहे कई स्पोर्ट्स प्रोजेक्ट्स को भी नेशनल गेम्स के बाद अधिक स्पष्ट दिशा और गति मिली। आने वाले वर्षों में अन्य सुविधाओं के विकास के साथ स्पोर्ट्स कैपिटल का विचार अधिक स्पष्ट रूप से आकार लेता गया।

दुनिया के सबसे बड़े क्रिकेट स्टेडियम से मिली वैश्विक पहचान

अगर अहमदाबाद के स्पोर्ट्स विजन का कोई एक प्रतीक चुनना हो, तो वह निस्संदेह नरेंद्र मोदी स्टेडियम है। एक लाख से अधिक दर्शकों की क्षमता वाला यह स्टेडियम दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम है। लेकिन इसकी महत्ता सिर्फ इसके आकार में नहीं है। इसकी महत्ता इसमें है कि इसने अहमदाबाद को वैश्विक खेल के नक्शे पर ऐसी पहचान दिलाई, जो शायद पहले कभी नहीं मिली थी।

नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम

विश्व कप के मैच, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट और वैश्विक स्तर के कार्यक्रमों ने लाखों लोगों का ध्यान अहमदाबाद की तरफ खींचा। लेकिन स्पोर्ट्स कैपिटल के नजरिए से देखा जाए तो नरेंद्र मोदी स्टेडियम एक अंतिम उपलब्धि नहीं, बल्कि शुरुआत थी। स्टेडियम ने शहर को दिखाया कि खेल सिर्फ मनोरंजन या प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है, यह शहर की ब्रांडिंग, निवेश, पर्यटन और वैश्विक प्रतिष्ठा से भी जुड़ा है। आज जब स्पोर्ट्स कैपिटल की बात होती है, तब यह स्टेडियम पूरे विजन का प्रतीक बनकर सामने आता है।

मोटेरा में खड़ा हो रहा भविष्य का स्पोर्ट्स इकोसिस्टम

अगर नरेंद्र मोदी स्टेडियम इस उपलब्धि का प्रवेश द्वार है, तो सरदार वल्लभभाई पटेल (SVP) स्पोर्ट्स एन्क्लेव इसकी आत्मा है। पिछले कुछ वर्षों में अहमदाबाद के स्पोर्ट्स विजन को लेकर जो भी चर्चा हुई है, उसके केंद्र में यह प्रोजेक्ट लगातार रहा है। स्पोर्ट्स एन्क्लेव को सिर्फ एक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स के रूप में देखना इसके साथ अन्याय करने जैसा होगा। वास्तव में इसकी कल्पना एक संपूर्ण स्पोर्ट्स सिटी के रूप में की गई है। 236 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट को भविष्य के बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है।

मोटेरा इलाके में विकसित किए जा रहे इस विशाल प्रोजेक्ट में एक्वैटिक्स सेंटर, इनडोर एरिना, टेनिस फैसिलिटीज, एथलीट्स विलेज, ट्रेनिंग सेंटर्स और अन्य कई सुविधाएँ शामिल हैं। दुनिया के सफल ओलंपिक शहरों में जिस तरह का एकीकृत (इंटीग्रेटेड) स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर देखने को मिलता है, वैसा ही मॉडल अहमदाबाद में खड़ा करने का प्रयास हो रहा है। यहां खिलाड़ियों को सिर्फ प्रतियोगिता के लिए मैदान नहीं, बल्कि ट्रेनिंग, आवास, रिकवरी और प्रदर्शन सुधारने के लिए विभिन्न सुविधाएं भी एक ही इकोसिस्टम में उपलब्ध कराने का विचार है।

SVP Sports (फोटो साभार: TOI)

इस प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह खेलों को शहर के विकास के साथ जोड़ता है। आमतौर पर भारत में खेलों के लिए अलग स्टेडियम या मैदान बनाए जाते हैं। लेकिन स्पोर्ट्स एन्क्लेव के पीछे का विचार अलग है। यहां खेल को एक संपूर्ण इकोसिस्टम के रूप में देखा जा रहा है। शायद यही कारण है कि इस प्रोजेक्ट को अहमदाबाद स्पोर्ट्स विजन का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है।

वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

विजन और वास्तविकता के बीच की दूरी अक्सर लंबी होती है। लेकिन वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स उस दूरी को काफी हद तक कम करता है। लगभग ₹825 करोड़ की लागत से तैयार यह कॉम्प्लेक्स देश के सबसे बड़े और आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में से एक माना जाता है। यहाँ स्विमिंग, इनडोर गेम्स, विभिन्न ट्रेनिंग सुविधाएं और खिलाड़ियों के लिए जरूरी कई व्यवस्थाएँ उपलब्ध हैं।

वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स

सितंबर 2025 में इसके उद्घाटन के समय अमित शाह ने कहा था कि अहमदाबाद स्पोर्ट्स कैपिटल बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस बयान के पीछे का सबसे बड़ा कारण शायद यही कॉम्प्लेक्स था, क्योंकि यहां खेल के लिए आधुनिक सुविधाएं सिर्फ योजना के स्तर पर नहीं हैं, बल्कि वास्तविक रूप में मौजूद हैं। स्पोर्ट्स कैपिटल के विचार को यदि कोई व्यक्ति छूने योग्य वास्तविकता के रूप में देखना चाहे, तो वीर सावरकर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स इसका सबसे मजबूत उदाहरण है।

सिर्फ मोटेरा नहीं, पूरा अहमदाबाद बन रहा है स्पोर्ट्स हब

कई शहर एक बड़ा स्टेडियम बना सकते हैं। कई शहर एक भव्य स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स भी खड़ा कर सकते हैं। लेकिन स्पोर्ट्स कैपिटल बनने के लिए सिर्फ कुछ मेगा प्रोजेक्ट्स काफी नहीं हैं। इसके लिए खेल शहर के हर कोने में पहुंचने चाहिए। शायद यही कारण है कि अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन (AMC) पिछले कुछ वर्षों से शहरव्यापी स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर पर विशेष ध्यान दे रही है।

शहर में 10 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और 27 नए प्लेग्राउंड्स विकसित करने की योजना सिर्फ एक सरकारी घोषणा नहीं है। यह स्पोर्ट्स कैपिटल विजन को शहर के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंचाने का प्रयास है। नए वाडज से लेकर राणिप, निकोल, नरोडा, वटवा, सरखेज और अन्य क्षेत्रों तक खेल की सुविधाएँ पहुँचाने का प्रयास हो रहा है। यह दर्शाता है कि स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर अब सिर्फ शहर के प्रीमियम इलाकों तक सीमित नहीं है।

AMC के आँकड़ों के मुताबिक, शहर में पहले से ही दर्जनों जिमनेजियम, स्केटिंग रिंक, टेनिस कोर्ट, स्पोर्ट्स सेंटर्स और रीक्रीएशन फैसिलिटीज कार्यरत हैं। नए प्रोजेक्ट्स इस नेटवर्क को और मजबूत बनाने वाले हैं। स्पोर्ट्स कैपिटल का मतलब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं है। इसका मतलब यह भी है कि शहर के आम युवाओं को अपने घर के पास खेल की अच्छी सुविधा मिल सके। अहमदाबाद में वर्तमान में जो प्रक्रिया चल रही है, उसमें इन दोनों बातों को एक साथ जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।

खेल महाकुंभ: इमारतें ही नहीं, खिलाड़ी भी जरूरी हैं

स्पोर्ट्स कैपिटल की चर्चा अक्सर स्टेडियमों और इमारतों के इर्द-गिर्द रुक जाती है। लेकिन कोई भी शहर सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर से स्पोर्ट्स कैपिटल नहीं बन सकता। उसके पीछे खिलाड़ी होने चाहिए, खेल की संस्कृति होनी चाहिए, बच्चों और युवाओं को खेल की तरफ आकर्षित करने वाला ढांचा होना चाहिए।

गुजरात में खेल महाकुंभ वर्षों से यह काम कर रहा है। लाखों छात्रों और युवाओं को एक प्रतिस्पर्धी ढाँचा प्रदान करने वाला यह कार्यक्रम राज्य की खेल संस्कृति को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। बड़े स्टेडियम और स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स एक तरफ हैं, लेकिन दूसरी तरफ खेल महाकुंभ जैसी पहलें हैं, जो नए खिलाड़ी तैयार करती हैं। स्पोर्ट्स कैपिटल बनने के लिए दोनों जरूरी हैं। अहमदाबाद के मामले में दिलचस्प बात यह है कि यहां इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्रासरूट्स स्पोर्ट्स कल्चर दोनों पर एक साथ काम होता दिख रहा है।

स्पोर्ट्स जोन और बदलता शहर

अहमदाबाद की स्पोर्ट्स स्टोरी सिर्फ स्टेडियमों तक सीमित नहीं है। शहर के कुछ हिस्सों में खेल को केंद्र में रखकर अर्बन प्लानिंग भी की जा रही है। स्पोर्ट्स प्रिसिंक्ट कॉरिडोर प्रोजेक्ट इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। SVP स्पोर्ट्स एन्क्लेव की ओर जाने वाला यह 7 किमी का कॉरिडोर सिर्फ सड़क विकास का प्रोजेक्ट नहीं है, यह खेल को शहर की पहचान से जोड़ने का प्रयास है।

दुनिया के कई बड़े स्पोर्ट्स शहरों में स्पोर्ट्स डिस्ट्रिक्ट्स देखने को मिलते हैं, जहाँ खेल सिर्फ इवेंट्स तक सीमित नहीं रहते, बल्कि शहर के सार्वजनिक जीवन और डिजाइन का हिस्सा बन जाते हैं। अहमदाबाद में भी अब इस तरह की विचारधारा दिखने लगी है। यह स्पोर्ट्स कैपिटल विजन को और मजबूत बनाता है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की ओर बढ़ता अहमदाबाद

स्पोर्ट्स कैपिटल की पहचान के लिए अंतरराष्ट्रीय इवेंट्स भी जरूरी होते हैं। पिछले कुछ वर्षों में अहमदाबाद ने इस दिशा में भी उल्लेखनीय प्रगति की है। एशियन एक्वैटिक्स चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताओं ने शहर की क्षमता को प्रदर्शित किया है। 2029 में आयोजित होने वाले वर्ल्ड पुलिस एंड फायर गेम्स भी इसी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनने जा रहे हैं।

इस प्रकार की प्रतियोगिताओं का लाभ सिर्फ प्रतिष्ठा तक सीमित नहीं होता। वे शहर को वैश्विक मानकों के अनुसार काम करने का अवसर देती हैं। आयोजन की क्षमता बढ़ती है, इन्फ्रास्ट्रक्चर और मजबूत होता है तथा खिलाड़ियों और प्रशासन दोनों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलता है। स्पोर्ट्स कैपिटल बनने की दिशा में आगे बढ़ने वाले किसी भी शहर के लिए यह प्रक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।

कॉमनवेल्थ गेम्स, ओलंपिक्स और अगले दशक का रोडमैप

इस पूरी यात्रा का सबसे महत्वाकांक्षी अध्याय अभी आगे है। कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक्स को ध्यान में रखकर जो प्लानिंग की जा रही है, वह सिर्फ खेल तक सीमित नहीं है। इसमें परिवहन, शहरी विकास, खिलाड़ियों के लिए सुविधाएं, सार्वजनिक स्थान और इन्फ्रास्ट्रक्चर के कई पहलू जुड़े हुए हैं।

आज स्पोर्ट्स एन्क्लेव, एथलीट्स विलेज, एक्वैटिक्स इन्फ्रास्ट्रक्चर, नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और अर्बन स्पोर्ट्स प्लानिंग को देखा जाए तो समझ में आता है कि शहर सिर्फ आज के लिए तैयार नहीं हो रहा है, वह अगले दशकों को ध्यान में रखकर खुद को ढाल रहा है। शायद यही बात अहमदाबाद की स्पोर्ट्स स्टोरी को अन्य शहरों से अलग बनाती है।

नई पहचान की ओर बढ़ता शहर

दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम, ओलंपिक-ग्रेड स्पोर्ट्स एन्क्लेव, ₹825 करोड़ का आधुनिक स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, शहरव्यापी स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर, 10 नए स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, 27 प्लेग्राउंड्स, खेल महाकुंभ जैसी ग्रासरूट्स स्पोर्ट्स मूवमेंट, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का आयोजन और कॉमनवेल्थ गेम्स तथा ओलंपिक्स को ध्यान में रखकर की जा रही प्लानिंग।

यह सब एक साथ देखने पर साफ होता है कि अहमदाबाद में चल रही प्रक्रिया को सिर्फ कुछ अलग-अलग प्रोजेक्ट्स के रूप में देखना सही नहीं है। वास्तव में यहां एक संपूर्ण स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार हो रहा है। एक ऐसा इकोसिस्टम, जो खेल को केवल एक प्रतियोगिता के रूप में नहीं, बल्कि शहर के भविष्य, युवा शक्ति, वैश्विक पहचान और विकास के केंद्र के रूप में देखता है।

अहमदाबाद की यह यात्रा अभी पूरी नहीं हुई है। कई प्रोजेक्ट्स अभी निर्माणाधीन हैं और कई लक्ष्य अभी आगे हैं। लेकिन इतना तय कहा जा सकता है कि पिछले कुछ वर्षों में शहर ने जो दिशा चुनी है, वह इसे सिर्फ क्रिकेट के शहर से आगे ले जा रही है। शायद यही कारण है कि आज जब अहमदाबाद स्पोर्ट्स कैपिटल की बात होती है, तो यह सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि धीरे-धीरे आकार लेती एक वास्तविकता जैसा लगता है।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट गुजराती में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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ભાર્ગવ રાજ્યગુરુ
ભાર્ગવ રાજ્યગુરુ
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