हरियाणा के फरीदाबाद में शिक्षा विभाग द्वारा सुरक्षा की दृष्टि से लिए गए एक फैसले को लेकर विवाद हो गया है। मामला उस पत्र से जुड़ा है जो जिला शिक्षा अधिकारी ने बुधवार (29 अक्टूबर 2025) को सभी स्कूलों को भेजा था। इसमें कहा गया था कि स्कूल ऐसे छात्रों पर नजर रखें जो कक्षाएँ छोड़कर बाहर जाते हैं या किसी तरह की ‘असामाजिक गतिविधियों’ और ‘लव जिहाद’ में शामिल पाए जाते हैं।
यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होते ही हंगामा मच गया। आलोचना के चलते विभाग को अगली ही दिन यह आदेश वापस लेना पड़ा। पत्र के मुताबिक, सभी सरकारी और निजी स्कूलों को निर्देश दिए गए थे कि वे छात्रों की उपस्थिति को सख्ती से दर्ज करें। इसमें कहा गया था कि स्कूल खुलने के आधे घंटे के भीतर अटेंडेंस ली जाए ताकि यह पता चल सके कि कोई छात्र बीच में स्कूल से गायब तो नहीं है।
शिक्षा अधिकारी ने दावा किया था कि कुछ छात्र-छात्राएँ स्कूल टाइम में पार्कों में घूमते हैं और अनुशासनहीन व्यवहार करते हैं। इसके चलते सभी स्कूलों को आदेश दिया गया कि हर कक्षा के छात्रों और उनके अभिभावकों का एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया जाए। इसमें अनुपस्थित छात्रों की जानकारी तुरंत साझा करने को कहा गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि शिकायत मिलने पर संबंधित स्कूल के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जारी किया गया यह पत्र जैसे ही सार्वजनिक हुआ, शिक्षा जगत और सामाजिक संगठनों ने इसकी तीखी आलोचना की। उनका कहना था कि छात्रों की निगरानी तो ठीक है, लेकिन ‘लव जिहाद’ जैसी शब्दावली को शिक्षा संबंधी आदेश में शामिल करना गलत है।

