दिल्ली ब्लास्ट के आरोपित आतंकी मुजम्मिल की गर्लफ्रेंड डॉ शाहीन सईद से जुड़ी जाँच में सुरक्षा एजेंसियों को अब बड़े सुराग मिले हैं। जानकारी के अनुसार, कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी छोड़ने के बाद शाहीन का विदेशी कनेक्शन सामने आया है।
जाँच में पता चला है कि वह साल 2016 से 2018 के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में कार्यरत थी। एजेंसियों को संदेह है कि इसी दौरान उसने पाकिस्तान के संपर्क साधे और आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला इकाई ‘जमात-उल-मोमिनात’ से जुड़ाव शुरू किया।
असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में शुरू की नौकरी
रिकॉर्ड्स के मुताबिक, शाहीन ने 2006-07 में कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में नौकरी शुरू की थी, लेकिन 2013 में उसने अचानक इस्तीफा दे दिया। उसी अवधि में वह कई कट्टरपंथी लोगों के संपर्क में आई और अपने विचारों में तेजी से बदलाव लाने लगी।
जाँच में पता चला है कि वह 1 सितंबर 2012 से 31 दिसंबर 2013 तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में फार्माकोलॉजी विभाग की प्रमुख रही। 2012 में डॉ शाहीन ने कानपुर मेडिकल कॉलेज में प्रवेश लेने के बाद अपना मेडिकल फॉर्म जमा किया।
उसके बाद शाहीन 2013 तक कानपुर मेडिकल कॉलेज में लेक्चरर के रूप में कार्यरत रही। बाद में उसका तबादला कन्नौज मेडिकल कॉलेज कर दिया गया।
Delhi terror blast case | One of the accused of the blast case, Dr Shaheen Saeed, served as the Head of the Department of Pharmacology from September 1, 2012, to December 31, 2013, at Kanpur Medical College. In 2012, Dr Shaheen Saeed submitted her medical form upon joining Kanpur… pic.twitter.com/UiYYVFtSRx
— ANI (@ANI) November 13, 2025
नौकरी छोड़ने के बाद उसकी विदेश यात्राओं ने जाँच एजेंसियों का ध्यान खींचा, क्योंकि अब यह शक गहराता जा रहा है कि उसने इन यात्राओं का इस्तेमाल आतंकी नेटवर्क से जुड़ने के लिए किया।
एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि UAE में रहते हुए शाहीन किन लोगों के संपर्क में थी और वहाँ उसकी गतिविधियाँ क्या थीं। जाँच की दिशा उस समय और तेज हो गई जब दिल्ली के लाल किले के पास हुए बम धमाके में शाहीन की संलिप्तता के संकेत मिले।
प्रयागराज के में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से किया MBBS
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहीन की कहानी प्रयागराज से शुरू होती है। उसने 1996 में मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में MBBS में दाखिला लिया था और 2002 में यह पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उसी कॉलेज से फार्माकोलॉजी में MD की डिग्री हासिल की।
2015 में नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ जफर हयात से तलाक के बाद वह मानसिक रूप से अस्थिर हुई और इसी दौर में उसकी मुलाकात फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी में डॉ मुजम्मिल शकील से हुई। मुजम्मिल ने उसे विश्वविद्यालय में नौकरी दिलवाई और धीरे-धीरे शाहीन को जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग से जोड़ा गया।
आतंकी संगठन जैश ने महिला कमांडर के रुप में किया तैयार
एजेंसियों के अनुसार, संगठन ने शाहीन को एक ‘महिला कमांडर’ के रूप में तैयार किया, जो अपनी मेडिकल पहचान का इस्तेमाल करके जम्मू-कश्मीर, दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा में आतंकी नेटवर्क को आर्थिक और लॉजिस्टिक मदद पहुँचाती रही।
एजेंसी की जाँच में एक और बड़ी बात सामने आई है कि लाल किला विस्फोट के आरोपित डॉ मुजम्मिल, डॉ अदील, उमर और शाहीन ने मिलकर लगभग 20 लाख रुपए नकद जुटाए, जो उमर को सौंपे गए।
Delhi terror blast case | The Red Fort blast accused Dr Muzammil, Dr Adeel, Umar, and Shaheen jointly raised around Rs 20 lakhs in cash, which was handed over to Umar. They later procured more than 20 quintals of NPK Fertiliser worth Rs 3 lakhs from Gurugram, Nuh and nearby areas…
— ANI (@ANI) November 13, 2025
बाद में उन्होंने गुरुग्राम, नूंह और आसपास के इलाकों से IED तैयार करने के लिए 3 लाख रुपए मूल्य का 20 क्विंटल से ज्यादा NPK उर्वरक खरीदा। उमर और डॉ मुजम्मिल के बीच पैसों का विवाद भी था।
इस बीच, शाहीन की पुरानी तस्वीरें और उसके प्रवेश फॉर्म की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई हैं, जबकि जाँच एजेंसियाँ उसके पुराने सहपाठियों और शिक्षकों से भी जानकारी जुटा रही हैं।

