कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने हाल में उन नेताओं को आड़े हाथों लिया है जो विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में प्रधानमंत्री मोदी को घेरते हैं। कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता ने साफ शब्दों में कहा है कि इन मुद्दों को राजनीति से ऊपर रखकर देखने की जरूरत है।
थरूर ने विदेश नीति में राष्ट्रीय एकता की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “कोई भाजपा विदेश नीति या कॉन्ग्रेस विदेश नीति नहीं, हमारी केवल भारतीय विदेश नीति है। यदि राजनीति में कोई प्रधानमंत्री मोदी की हार देखकर खुश होता है, तो मुझे केवल भारत की हार ही दिखती है।”
उन्होंने यह बात इंडिया टुडे को दिए एक इंटरव्यू के दौरान कही- जिसमें भारत–पाकिस्तान संबंधों से लेकर दक्षिण एशिया की बदलती भू-राजनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
पाकिस्तान की बदलती सैन्य रणनीति, भारत का मजबूत होना जरूरी
शशि थरूर के अनुसार, भारत को पाकिस्तान से आने वाले सुरक्षा जोखिमों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। उन्होंने चेताया कि पाकिस्तान अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव कर रहा है। पहले जहाँ वह ड्रोन, रॉकेट और सीमित मिसाइल हमलों पर निर्भर था, अब वह अत्याधुनिक और ज्यादा खतरनाक तकनीकों की ओर बढ़ रहा है।
थरूर ने कहा कि हाइपरसोनिक मिसाइल जैसी तेज और पकड़ से बाहर रहने वाली तकनीकें, साथ ही छिपकर हमला करने की रणनीति, भविष्य में भारत के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं। ऐसे में भारत को सतर्क रहना होगा और सुरक्षा तैयारियों को लगातार मजबूत करना होगा।
पाकिस्तान की आंतरिक कमजोरियाँ और जोखिम भरे फैसले
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति पर बात करते हुए थरूर ने उसे एक अस्थिर और समस्याओं से घिरा देश बताया। उनके अनुसार वहाँ लोकतांत्रिक सरकार केवल नाम की है, जबकि असली नियंत्रण फौज के पास है। नीति निर्धारण से लेकर बड़े फैसलों तक, फौज की भूमिका निर्णायक रहती है।
आर्थिक मोर्चे पर भी पाकिस्तान बेहद कमजोर स्थिति में है। उसकी आर्थिक वृद्धि दर भारत की तुलना में काफी कम है और वह बार-बार अंतरराष्ट्रीय मदद पर निर्भर रहता है। थरूर ने आगाह किया कि आर्थिक कमजोरी कभी-कभी देशों को जोखिम भरे और आक्रामक कदम उठाने के लिए प्रेरित कर सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान अब उन क्षेत्रों में पैर जमाने की कोशिश कर रहा है, जहाँ भारत पहले से मजबूत है, जैसे टेक्सटाइल और कृषि। इसके अलावा, अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ खनिज संसाधनों और नई तकनीकों को लेकर उसके प्रस्ताव यह दिखाते हैं कि वह वैश्विक स्तर पर नए सहारे तलाश रहा है।
बांग्लादेश, क्षेत्रीय अस्थिरता और भारत की चिंता
दक्षिण एशिया की स्थिति पर बात करते हुए थरूर ने बांग्लादेश को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश इस समय ऊर्जा संकट, बढ़ती महँगाई और कमजोर निवेश माहौल जैसी समस्याओं से जूझ रहा है। ऐसे हालात में अगर वहाँ राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता बढ़ती है, तो उसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।
थरूर ने बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच संभावित रक्षा सहयोग की चर्चाओं को भी एक चेतावनी संकेत बताया। उनके अनुसार, कुछ कट्टरपंथी और अलगाववादी ताकतें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को लेकर खुले तौर पर धमकियाँ दे रही हैं, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत ने बांग्लादेश के लिए बंदरगाह, रेल और ऊर्जा ग्रिड से जुड़ी कई क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाएँ पेश की हैं, जो दोनों देशों के हित में हैं। लेकिन इन योजनाओं की सफलता बांग्लादेश में शांति और स्थिरता पर निर्भर करती है।

