धर्मांतरण विरोधी कानून से तिलमिलाया ईसाई संगठन, रोक लगाने की माँग लेकर पहुँचा SC के पास: अदालत ने 12 राज्यों को जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 12 राज्यों में लागू धर्मांतरण विरोधी कानूनों को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस ईसाई संगठन नेशनल काउंसिल ऑफ चर्चेज इन इंडिया (NCCI) की जनहित याचिका पर जारी किया गया है, जिसमें इन कानूनों को व्यक्तिगत धर्म की स्वतंत्रता और निजी फैसलों के अधिकार का उल्लंघन बताया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सोमवार (02 फरवरी 2026) को NCCI की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने केंद्र सरकार और 12 राज्य सरकारों को नोटिस जारी करते हुए 4 हफ्तों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया है कि इस नई याचिका को पहले लंबित समान मामलों के साथ जोड़ा जाए ताकि सभी सवालों पर एक साथ तीन जजों वाली पीठ द्वारा सुनवाई हो सके। कोर्ट ने जिन 12 राज्यों को नोटिस भेजा है, उनमें ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा और राजस्थान शामिल हैं।

NCCI ने याचिका में क्या कहा?

याचिका में NCCI ने यह आरोप लगाया है कि कई राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानून धर्म की आजादी और निजी फैसलों पर प्रभाव डालते हैं और कुछ कानूनों की धारणाएँ संपर्कहीन लोगों को शिकायत करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जिससे असंतुष्टियाँ बढ़ती हैं। NCCI ने इन कानूनों पर तुरंत रोक लगाने की भी माँग की है।

वहीं केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहना ने कहा कि सरकार का जवाब तैयार है और जल्द ही दाखिल किया जाएगा। सुनवाई के दौरान उन्होंने कहा कि राज्यों के पास इन कानूनों को लागू करने के लिए पर्याप्त आधार हैं और सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ पहले ही इन कानूनों की संवैधानिक वैधता को मंजूरी दे चुकी है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लंबित मामलों के साथ-साथ इस नए मामलों पर भी लागू होता है।