1996 के ड्रग प्लांटिंग मामले में संजीव भट्ट की सजा कम करवाने पहुँचे कपिल सिब्बल, SC ने याचिका कर दी खरिज: झूठे केस में वकील को फँसाना चाहते थे बदनाम IPS

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (11 दिसंबर 2025) को 1996 के ड्रग प्लांटिंग केस में पूर्व IPS अधिकारी संजीव भट्ट को दी गई 20 साल की सजा को खारिज करने से साफ इनकार कर दिया।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिष्णोई की बेंच के सामने भट्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल पेश हुए और दलील दी कि भट्ट पहले ही 7 साल 3 महीने की सजा काट चुके हैं। सिब्बल का कहना था कि जिन ड्रग्स की बरामदगी पर सजा दी गई, वह गैर-व्यावसायिक मात्रा थी, इसलिए इतनी कठोर सजा नहीं बनती।

हालाँकि, राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने इसका विरोध करते हुए कहा कि मामला बहुत गंभीर है और इसमें पहले से तय साजिश के तहत राजस्थान के वकील को फँसाया गया था।

उन्होंने दावा किया कि पुलिस अधिकारियों ने अफीम की खरीद करवा कर उसे होटल के कमरे में रखवाया, ताकि झूठा केस बन सके। अनुराग सिंह ने कहा कि कुल बरामदगी 1.015 किलो से अधिक थी, जो NDPS कानून के तहत सख्त सजा का आधार है।

बेंच ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद स्पष्ट कहा कि वह सजा पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं है। कोर्ट ने भट्ट की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह चाहें तो मामले की जल्दी सुनवाई के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं। आदेश सुनाए जाने के बाद सिब्बल ने कहा, “इसका मतलब है कि अब उसे तीन साल और जेल में रहना पड़ेगा।”

इससे पहले गुजरात हाई कोर्ट ने भी भट्ट की याचिका को अपराध की गंभीरता, NDPS एक्ट की कठोर धाराओं और समाज पर प्रभाव का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था।

क्या था मामला?

यह केस 1996 का है, जब राजस्थान के वकील सुमेर सिंह राजपुरोहित को गुजरात के बनासकांठा जिले के एक होटल से अफीम रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। बाद में जाँच में सामने आया कि उस समय जिले के DSP रहे संजीव भट्ट और अन्य पुलिसकर्मियों ने कथित रूप से साजिश के तहत अफीम प्लांट कर वकील को फँसाया, ताकि एक विवाद को लेकर उसे परेशान किया जा सके।

2018 में CID जाँच के बाद भट्ट को गिरफ्तार किया गया और 2024 में सेशंस कोर्ट ने उन्हें 20 साल की सजा सुनाई। भट्ट इससे पहले 1990 के एक कस्टोडियल डेथ केस में उम्रकैद की सजा भी पा चुके हैं।