तमिलनाडु के मदुरै जिले में स्थित थिरुपरनकुंद्रम की पहाड़ी पर दीप जलाने को लेकर चल रहा ‘दीपम विवाद’ अब देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गया है। मद्रास हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की है। हाई कोर्ट ने पहाड़ी पर एक दरगाह के पास बने पत्थर के खंभे पर कार्तिकई दीपम जलाने की अनुमति दी थी, जिसे सरकार ने चुनौती दी है।
यह विवाद तब और गहरा गया जब तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव के बाद टीवीके (TVK) प्रमुख विजय की अगुवाई वाली नई सरकार ने कार्यभार संभाला। सरकार ने 11 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। दरअसल, मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने इसी साल 6 जनवरी को सिंगल बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें पहाड़ी के ऊपर ‘दीपा थून’ (पत्थर के दीपक स्तंभ) पर दीप जलाने की इजाजत दी गई थी। यह जगह पहाड़ी पर स्थित एक ऐतिहासिक दरगाह से करीब 50 मीटर की दूरी पर है।
हिंदू संगठनों और स्थानीय श्रद्धालुओं का आरोप है कि राज्य सरकार की यह कार्रवाई सनातनी हिंदुओं की आस्था और भावनाओं के खिलाफ है। हिंदू धर्म परिषद ने भी इस मामले में याचिका दायर कर तिरुपरंकुंद्रम मंदिर और उससे जुड़े धार्मिक अधिकारों की रक्षा की माँग की है। लोगों का कहना है कि तमिलनाडु के नेताओं और मंत्रियों को हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं की परवाह नहीं है और वे इसे सिर्फ एक वोट बैंक की तरह देखते हैं।
बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने विजय सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि विजय के शासन में हिंदू धर्म को दूसरे नागरिक का दर्जा दिया गया है। उन्होंने आगे कहा कि विजय की अगुवाई वाली सत्तारुढ़ टीवीके पार्टी कुछ नहीं सिर्फ वह डीएमके पार्टी का मास्क है जो उसी की तरह सनातन विरोधी भी है।
Deepam Row returns
— Shehzad Jai Hind (Chowkidar as per INC ecosystem) (@Shehzad_Ind) June 23, 2026
Joseph Vijay govt files appeal in SC:
– TVK govt appeals against lighting Deepam
– Vijay govt follows Stalin govt's stance
Do Hindus have no rights in Tamil Nadu? pic.twitter.com/rybOuReNqp
दूसरी तरफ राज्य के हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने अदालत में इस याचिका का कड़ा विरोध किया है। विभाग का तर्क है कि ‘दीपा थून’ पर दीपक जलाने की कोई ऐतिहासिक या पारंपरिक प्रथा नहीं रही है।

