डोनाल्ड ट्रम्प के नाम पर सीरियाई अरबपतियों ने रखा प्रोजेक्ट का नाम, ताकि पा सकें अरबों का फायदा: समझें- कैसे खुशामद करने पर पिघल जाते हैं US राष्ट्रपति

सीरियाई अमीर लोगों ने सीरिया पर लगे बैन को हटाने की कोशिश में अनोखी रणनीति अपनाई। उन्होंने ट्रंप की खुशामद के लिए पूरे प्रोजेक्ट का नाम ही ट्रंप के नाम पर रख दिया।

जी हाँ, अल-खय्यात परिवार के नेतृत्व में धनी सीरियाई कारोबारियों का एक ग्रुप अरबों डॉलर के पुनर्निर्माण अवसरों को हासिल करने के लिए एक असामान्य रणनीति पर काम कर रहा था। उनकी योजना का केंद्र यह था कि इसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाम से जोड़ा जाए। इस पूरी कोशिश के बीच एक सीरियाई अरबपति था, जो करीब 12 अरब डॉलर के रीबिल्डिंग कॉन्ट्रैक्ट्स से फायदा उठाना चाहता था, लेकिन यह सब काफी हद तक सीरिया पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों के हटने पर निर्भर था, जैसा कि दी न्यू यौर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में सामने आया।

ध्यान खींचने के लिए गोल्फ कोर्स का आइडिया

2025 की गर्मियों में निवेशक मोहम्मद अल-खैयात और उनके साथियों ने अमेरिकी सांसद जो विल्सन के सामने एक बड़ा विजन रखा। इस योजना में सीरिया के समुद्री तट पर एक क्रूज़ पोर्ट, पोलो क्लब, बुगाटी शोरूम और एक लग्जरी गोल्फ कोर्स बनाने की बात शामिल थी। लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण इस तरह की परियोजना के लिए फंड जुटाना लगभग नामुमकिन था।

इसी दौरान बातचीत में विल्सन ने सुझाव दिया कि अगर इस प्रोजेक्ट को ट्रम्प नेशनल गोल्फ कोर्स के नाम से पेश किया जाए, तो वॉशिंगटन में ध्यान खींचना आसान हो सकता है। उनका इशारा साफ था कि ट्रम्प का नाम जोड़ने से रास्ते खुल सकते हैं। इस पर अल-खैयात ने कहा कि ट्रम्प ब्रांड वाला रिज़ॉर्ट पहले से ही उनकी सोच का हिस्सा था।

सीरिया से बाहर भी बिजनेस डील्स

इसी समय खैयात परिवार, ट्रम्प के करीबी लोगों से भी संबंध मजबूत कर रहा था। उन्होंने अल्बानिया में ट्रम्प की बेटी इवांका ट्रम्प और उनके पति जेरेड कुशनर के साथ एक बड़ा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट शुरू किया।

जो शुरुआत में एक ठेकेदारी जैसा था, वह धीरे-धीरे पूरी साझेदारी में बदल गया, जिसमें दोनों पक्ष निवेश और मैनेजमेंट में साथ आए। इवांका ट्रम्प खुद अल्बानिया गईं और खैयात भाइयों, आर्किटेक्ट्स और स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्रोजेक्ट पर चर्चा की।

इससे दोनों पक्षों के बीच बढ़ते भरोसे का संकेत मिला और यह सवाल भी उठे कि बिजनेस और पॉलिसी के बीच की सीमाएँ कितनी साफ हैं।

वॉशिंगटन भेजा गया एक पत्थर

इस पूरी रणनीति का एक दिलचस्प हिस्सा तब सामने आया जब अल-खैयात एक प्रतीकात्मक फाउंडेशन स्टोन लेकर वॉशिंगटन पहुँचे। इस पत्थर पर ट्रम्प परिवार का निशान बना था और इसे ट्रम्प इंटरनेशनल गोल्फ क्लब, सीरिया के नाम से लिखा गया था।

इसे रिपब्लिकन सांसदों को दिया गया, साथ ही यह सुझाव भी दिया गया कि इसे व्हाइट हाउस में दिखाया जाए ताकि राष्ट्रपति का ध्यान खींचा जा सके।

नीतिगत बदलाव और प्रतिबंधों में ढील

2025 के मध्य तक अमेरिका ने सीरिया पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर दिया था। उसी साल के अंत में, कॉन्ग्रेस ने करीब 1 ट्रिलियन डॉलर के रक्षा बजट बिल में प्रतिबंध हटाने का प्रावधान भी शामिल कर दिया।

डोनाल्ड ट्रम्प ने 18 दिसंबर 2025 को इस कानून पर हस्ताक्षर किए। इस प्रक्रिया में अमेरिकी प्रतिनिधि ब्राइन मस्त जैसे प्रमुख नेताओं की भूमिका रही। हालाँकि अधिकारियों ने साफ कहा कि इन फैसलों का ट्रम्प परिवार के बिजनेस से कोई संबंध नहीं था।

व्हाइट हाउस और ट्रम्प ऑर्गेनाइजेशन ने भी इस गोल्फ प्रोजेक्ट में किसी भी तरह की भागीदारी से इनकार किया और कहा कि राष्ट्रपति ने सभी नैतिक सीमाओं का पालन किया।

प्रभाव, लॉबिंग और नए मौके

पर्दे के पीछे, सीरियाई-अमेरिकी कारोबारी तारिक नामों और अन्य लोगों ने लॉबिंग और राजनीतिक संपर्कों के जरिए प्रतिबंध हटाने के समर्थन में माहौल बनाया। जैसे-जैसे वॉशिंगटन का रुख बदला, उनके प्रयास सफल होते दिखे। नीतियों में बदलाव के बाद, खैयात परिवार को कई बड़े कॉन्ट्रैक्ट मिले, जिनमें दमिश्क एयरपोर्ट का पुनर्विकास, पावर प्रोजेक्ट्स और अमेरिकी कंपनियों के साथ गैस डील्स शामिल हैं। उन्होंने पर्यटन क्षेत्र में भी निवेश शुरू किया और ऐतिहासिक संपत्तियाँ खरीदनी शुरू कर दीं।

जमीन पर उठती चिंताएँ

जहाँ निवेशक इसे बड़े मौके के रूप में देख रहे हैं, वहीं सीरिया में सभी लोग इससे खुश नहीं हैं। समुद्री तट के पास रहने वाले किसान और स्थानीय समुदाय अपनी जमीन खोने को लेकर चिंतित हैं। यह इलाका अभी भी वर्षों के संघर्ष से उबर रहा है और हालात संवेदनशील बने हुए हैं।

आखिर में यह कहानी दिखाती है कि कैसे एक मजबूत ब्रांड, रणनीतिक साझेदारियाँ और राजनीतिक संपर्क मिलकर वॉशिंगटन के फैसलों को प्रभावित कर सकते हैं, जहाँ पुनर्निर्माण एक बड़े बिजनेस अवसर के साथ-साथ प्रभाव और नैतिकता की बहस भी बन जाता है।