बजट 2026: देश की रफ्तार बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे ₹12.2 लाख करोड़, निजी कंपनियों के लिए बनेगा ‘गारंटी फंड’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने 9वें बजट में देश की रफ्तार बढ़ाने के लिए ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ पर सबसे बड़ा दांव लगाया है। सरकार ने बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने के लिए ₹12.2 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट तय किया है। आसान भाषा में समझें तो यह पैसा नई सड़कों, रेलवे लाइनों, बिजली घरों और पुलों को बनाने पर खर्च होगा।

सरकार का मानना है कि जब देश में निर्माण कार्य तेजी से होगा, तो इससे न केवल सुविधाएँ बढ़ेंगी बल्कि लाखों लोगों को नई नौकरियाँ भी मिलेंगी। इस बजट की सबसे बड़ी बात यह है कि अब सरकार का ध्यान सिर्फ दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों पर ही नहीं है। वित्त मंत्री ने साफ किया है कि 5 लाख से ज्यादा आबादी वाले छोटे शहरों (टायर-2 और टायर-3) को नए ‘ग्रोथ सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

इन शहरों में रहने वाले लोगों को अब बेहतर सुविधाएँ मिलेंगी। साथ ही, देश में 7 नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने का काम शुरू होगा। इसमें दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे और हैदराबाद-बेंगलुरु जैसे रूट शामिल हैं, जिससे आपका सफर घंटों के बजाय मिनटों में पूरा हो सकेगा।

सरकार ने माल ढुलाई को सस्ता और तेज बनाने के लिए भी बड़ा कदम उठाया है। सूरत से दानकुनी तक एक नया ‘फ्रेट कॉरिडोर’ (मालगाड़ियों के लिए अलग रास्ता) बनाया जाएगा। इससे सामान एक शहर से दूसरे शहर जल्दी पहुँचेगा और महँगाई पर लगाम लगेगी।

इसके अलावा, विमान के कलपुर्जे बनाने और मछली पालन (सीफूड) जैसे उद्योगों को भी टैक्स में छूट दी गई है। निजी कंपनियों को इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए बढ़ावा देने के लिए एक ‘गारंटी फंड’ भी बनाया जाएगा, ताकि वे बिना किसी डर के देश के विकास में हाथ बँटा सकें।