केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने उन मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि आधार कार्ड में एक बड़ा बदलाव किया जा रहा है जिससे इसे केवल एक तस्वीर और एक क्यूआर कोड तक सीमित कर दिया जाएगा।
दावा किया जा रहा था कि आधार से सभी व्यक्तिगत विवरण हटा दिए जाएँगे और केवल क्यूआर कोड के भीतर एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहीत किए जाएँगे। अपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में सरकार ने कहा कि इस तरह के किसी भी बदलाव की कोई योजना नहीं है।
सरकार ने आधार कार्ड के कथित नए स्वरूप से संबंधित हालिया समाचार रिपोर्टों और सोशल मीडिया पोस्टों को गलत बताते हुए कहा कि ऐसे रिपोर्ट्स से वे लोगों के मन में अनावश्यक भ्रम पैदा कर रहे हैं।
मंत्रालय ने नागरिकों से ऐसी खबरों और सोशल मीडिया पोस्टों को नजरअंदाज करने और केवल भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) द्वारा सत्यापित चैनलों के माध्यम से जारी आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करने का आग्रह किया है। मीडिया संगठनों को भी अपुष्ट जानकारी को बढ़ावा न देने की सलाह दी गई।
‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ने किया था झूठा दावा
यह खंडन 27 अप्रैल, 2026 को द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित एक रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि UIDAI ने ‘आधार विजन 2032’ ढाँचे के तहत आधार कार्ड के डिजाइन में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। लेख के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य गोपनीयता बढ़ाना, निजी संस्थाओं द्वारा फोटोकॉपी के दुरुपयोग को रोकना और डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम के अनुरूप होना था।

रिपोर्ट में दावा किया गया था कि नए कार्ड पर केवल एक फोटो और एक सुरक्षित क्यूआर कोड प्रदर्शित होगा, जिसमें नाम, आधार नंबर, जन्मतिथि, पता और लिंग जैसी संवेदनशील जानकारी एन्क्रिप्टेड रूप में क्यूआर कोड के अंदर मौजूद होगी, जिसे केवल सरकार द्वारा अधिकृत स्कैनर या UIDAI के आधिकारिक ऐप के माध्यम से ही एक्सेस किया जा सकेगा।
लेख में अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि जल्द ही किसी को भी अपना आधार कार्ड देना सुरक्षित होगा, क्योंकि इसमें कोई मुद्रित विवरण नहीं होता है और इस कदम को धोखाधड़ी को कम करने और प्रमाणीकरण को मजबूत करने के लिए ‘डिजिटल-प्रथम’ पहचान प्रणाली की ओर बदलाव के रूप में वर्णित किया गया था।
सरकार द्वारा जारी स्पष्टीकरण से सोशल मीडिया पर फैल रही अटकलों पर विराम लग गया है। सरकार ने कहा है कि आधार कार्ड जो 1.4 अरब से अधिक पंजीकृत निवासियों के साथ दुनिया का सबसे बड़ा बायोमेट्रिक पहचान कार्यक्रम है और अगली आधिकारिक सूचना तक अपने वर्तमान स्वरूप में बना रहेगा।

