वैज्ञानिकों के बीच ब्रह्मांड के अंत को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस छिड़ गई है। अब तक माना जाता था कि ब्रह्मांड हमेशा फैलता रहेगा, लेकिन नए सबूत इस थ्योरी को चुनौती दे रहे हैं। दक्षिण कोरियाई वैज्ञानिकों की रिसर्च और अमेरिका के एरिजोना में लगे एक खास टेलीस्कोप (DESI) से मिले आँकड़ों ने चौंकाने वाला इशारा किया है।
संकेत मिल रहे हैं कि ब्रह्मांड को फैलाने वाली रहस्यमयी शक्ति, जिसे ‘डार्क एनर्जी’ कहा जाता है, समय के साथ अपना स्वरूप बदल रही है। अगर यह सच साबित होता है, तो ब्रह्मांड का अंत अनंत विस्तार (Big Rip) के बजाय वापस सिकुड़ने (Big Crunch) से हो सकता है।
क्या है डार्क एनर्जी का खेल?
इसे समझने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा। करीब 13.8 अरब साल पहले ‘बिग बैंग’ के बाद जब ब्रह्मांड बना, तो वैज्ञानिकों को लगा कि गुरुत्वाकर्षण के कारण इसकी रफ्तार धीरे-धीरे कम होगी।
लेकिन 1998 में पता चला कि ब्रह्मांड धीमा होने के बजाय और तेजी से फैल रहा है। इस फैलाव के पीछे जिस अदृश्य शक्ति का हाथ माना गया, उसे वैज्ञानिकों ने ‘डार्क एनर्जी’ नाम दिया। पहले माना जाता था कि यह शक्ति स्थिर है और ब्रह्मांड को हमेशा फैलाती रहेगी, जिससे एक दिन ग्रह-तारे और परमाणु तक टूटकर बिखर जाएँगे।
कमजोर पड़ रही है ताकत और ‘बिग क्रंच’ का खतरा
हाल ही में हुई रिसर्च ने इस पूरी धारणा को हिला दिया है। वैज्ञानिकों ने जब सुपरनोवा (तारों के विस्फोट) की चमक को उनकी उम्र के हिसाब से दोबारा मापा, तो पाया कि डार्क एनर्जी की ताकत धीरे-धीरे कम हो रही है।
विज्ञान का नियम कहता है कि अगर डार्क एनर्जी कमजोर पड़ी, तो गुरुत्वाकर्षण (Gravity) फिर से ताकतवर हो जाएगा। ऐसे में ब्रह्मांड फैलने के बजाय वापस अंदर की ओर सिकुड़ना शुरू कर सकता है। इसे वैज्ञानिक ‘बिग क्रंच’ कहते हैं, यानी सब कुछ वापस सिमटकर एक बिंदु में मिल जाना।
वैज्ञानिकों के बीच मतभेद बरकरार
हालाँकि, इस नई खोज को लेकर विज्ञान की दुनिया दो हिस्सों में बँट गई है। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के कई बड़े खगोलविदों का मानना है कि डेटा को मापने के तरीके में गलती हो सकती है।
वहीं, दक्षिण कोरिया के प्रो ली का दावा है कि उनकी रिसर्च 300 आकाशगंगाओं के अध्ययन पर आधारित है और इसके गलत होने की संभावना न के बराबर है। फिलहाल पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस रहस्य को सुलझाने में जुटे हैं कि क्या ब्रह्मांड हमें अपने विनाश का नया इशारा दे रहा है।

