5E मॉडल से UP में बदलेगा ट्रैफिक का हाल, निगरानी रखने के लिए होगा AI इस्तेमाल: जानिए योगी सरकार की C-RTC योजना से कैसे बदलेगी 20 शहरों की तस्वीर

उत्तर प्रदेश के बड़े शहरों में रोज लगने वाले ट्रैफिक जाम से परेशान लोगों के लिए अब राहत की उम्मीद जगी है। राज्य पुलिस ने 20 शहरों की 172 सड़कों को जाम से मुक्त कराने के लिए सिटी-रिड्यूसिंग ट्रैफिक कंजेशन (C-RTC) योजना शुरू की है।

DGP राजीव कृष्ण ने इसकी शुरुआत करते हुए कहा कि इसका मकसद लोगों को आसान, तेज और व्यवस्थित यातायात सुविधा देना है। बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की संख्या के कारण जाम की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही थी, जिसे देखते हुए यह तकनीक आधारित योजना लागू की गई है।

कैसे काम करेगी C-RTC योजना और क्या होंगे बदलाव

इस योजना के तहत जाम वाले प्रमुख रास्तों की पहचान की गई है, जहाँ ट्रैफिक का दबाव सबसे ज्यादा रहता है। इन सड़कों पर एक ‘रूट मार्शल’ तैनात किया जाएगा, जो ट्रैफिक को सुचारु रखने की जिम्मेदारी संभालेगा।

ये अधिकारी आमतौर पर ट्रैफिक इंस्पेक्टर या सब-इंस्पेक्टर स्तर के होंगे और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम करेंगे। योजना में 5E मॉडल अपनाया गया है, जिसमें जागरूकता, सख्ती से नियम लागू करना, इंजीनियरिंग सुधार, अतिक्रमण हटाना और तकनीक का इस्तेमाल शामिल है। इसके अलावा ई-रिक्शा संचालन को भी व्यवस्थित किया जाएगा, ताकि सड़क पर अव्यवस्था कम हो।

AI तकनीक से मिलेगी रियल टाइम जानकारी, आम लोगों को फायदा

इस योजना की खास बात आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल है। इसके जरिए ट्रैफिक की स्थिति को रियल टाइम में मॉनिटर किया जाएगा और जाम वाले स्थानों की तुरंत पहचान हो सकेगी। अधिकारी अपने मोबाइल पर ही ट्रैफिक की स्थिति देख सकेंगे और तुरंत निर्णय ले पाएँगे।

सरकार ने लक्ष्य रखा है कि पीक आवर्स में यात्रा का समय कम से कम 20 प्रतिशत घटाया जाए। इससे लोगों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और प्रदूषण भी घटेगा। साथ ही एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड जैसी इमरजेंसी सेवाओं को भी रास्ता मिलने में आसानी होगी।

पहले चरण में लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ, गाजियाबाद और नोएडा समेत 20 शहरों में इसे लागू किया गया है। एक महीने बाद इसकी समीक्षा की जाएगी, ताकि जरूरत के हिसाब से इसमें सुधार किया जा सके। सरकार को उम्मीद है कि यह योजना शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाएगी।

दुर्घटनाओं में भी आई कमी

बता दें कि इससे पहले प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पुलिस की ‘जीरो फेटेलिटी डिस्ट्रिक्ट‘ (ZFD) योजना लागू कर चुकी है। इसके तहत 487 सबसे ज्यादा दुर्घटना वाले थाना क्षेत्रों की पहचान कर पुलिस ने 573 विशेष टीमें बनाई, जिन्हें आधुनिक उपकरणों से लैस किया गया है।

इस योजना का परिणाम है कि पिछले तीन महीनों में वर्ष 2025 की तुलना में दुर्घटनाओं में 7.43%, मौतों में 11.55% और घायलों की संख्या में 8.05% की कमी दर्ज की गई है। राज्य की कुल 88 इकाइयों में से 56 इकाइयाँ (63.6%) दुर्घटनाओं के मामले में ग्रीन जोन में आ गई हैं, जबकि मौतों के मामलों में 66 इकाइयाँ (75%) ग्रीन जोन में हैं।