US-ईरान के बीच होगा शांति समझौता: होर्मुज खोलने से लेकर न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बनेगी बात, जानें 14 बिंदुओं के एग्रीमेंट में दोनों देशों ने रखी क्या-क्या शर्तें

अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों में तनाव कम करने की दिशा में एक शुरुआती समझौता होने की संभावना बढ़ गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते के तहत ईरान होर्मुज को जहाजों के लिए खुला रखेगा। वहीं अमेरिका भी इस क्षेत्र में अपनी नौसेना की घेराबंदी घटाएगा।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि दोनों देश आने वाले कुछ दिनों में शुरुआती समझौते का ऐलान कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि यह प्रस्ताव 14 बिंदुओं वाले एक समझौते पर आधारित है। इसके बाद बाकी बचे मुद्दों को सुलझाने के लिए करीब 60 दिनों तक बातचीत जारी रहेगी।

फिर से खुलेगा होर्मुज

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के मसौदे में कहा गया है कि ईरान तुरंत होर्मुज को सभी कमर्शियल जहाजों के लिए फिर से खोल देगा। इसके बदले में अमेरिका ईऱान के पोर्ट पर लगाई गई अपनी नौसेना की घेराबंदी को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा। यह प्रक्रिया करीब 30 दिनों के भीतर पूरी होने की उम्मीद है।

अधिकारी ने बताया कि इस मसौदे का मकसद बड़े स्तर की बातचीत के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना और पूरे क्षेत्र में बढ़े तनाव को कम करना है। इससे आगे चलकर ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम और उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों जैसे अहम मुद्दों पर भी बातचीत का रास्ता खुल सकता है।

न्यूक्लियर प्रोग्राम पर रोक और आगे की बातचीत

प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान यह वादा करेगा कि वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा। अंतिम समझौता होने तक ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को मौजूदा स्तर पर ही रखेगा। इसका मतलब है कि वह यूरेनियम को और ज्यादा शुद्ध (एनरिच) नहीं करेगा और न ही अपनी परमाणु सुविधाओं का विस्तार करेगा।

मसौदे में यह भी कहा गया है कि भविष्य में व्यापक समझौता होने पर अमेरिका, ईरान को अपने देश के अंदर ही उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करने की अनुमति देगा। ईरान के यूरेनियम संवर्धन, परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम के भंडार से जुड़े बाकी मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक चलने वाली बातचीत में फैसला किया जाएगा।

प्रतिबंधों में राहत और फँसी हुई संपत्तियाँ

इस प्रस्ताव में ईरान को आर्थिक राहत देने के लिए कई कदम शामिल हैं। बातचीत जारी रहने तक अमेरिका ईरान पर कोई नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा। साथ ही, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी छूट दी जाएगी, जिससे ईरान तेल बेच सकेगा और उससे मिलने वाली कमाई प्राप्त कर सकेगा।

इसके अलावा, विदेशों में फँसी ईरान की 25 अरब डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का भी प्रस्ताव है। यह राशि सीधे बैंक हस्तांतरण, वित्तीय क्रेडिट लाइनों और क्षेत्रीय देशों के सहयोग के जरिए ईरान को उपलब्ध कराई जाएगी। मसौदे में यह भी कहा गया है कि अमेरिका और उसके क्षेत्रीय साझेदार ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए एक योजना तैयार करेंगे, जिस पर अगले 60 दिनों में बातचीत होगी।

कतर की मध्यस्थता

इस बीच 14 जून 2026 को कतर का एक प्रतिनिधिमंडल तेहरान पहुँचा। यह दल कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जासिम अल थानी के सलाहकार के नेतृत्व में ईरानी अधिकारियों से बातचीत कर रहा है। यह प्रतिनिधिमंडल तेहरान और वॉशिंगटन के बीच संदेशों के आदान-प्रदान में भी अहम भूमिका निभा रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा कि इस समझौते पर 14 जून 2026 को हस्ताक्षर होने की उम्मीद है और इसके तुरंत बाद होर्मुज सभी जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। ट्रंप ने इस प्रस्ताव को न्यूक्लियर हथियारों को रोकने की दिशा में एक मजबूत कदम बताया और इसकी तुलना 2015 में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए न्यूक्लियर समझौते से की।

वहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जोर देकर कहा कि भविष्य में होने वाले किसी भी समझौते में स्पष्ट गारंटी होनी चाहिए, ताकि दोनों में से कोई भी पक्ष अपनी प्रतिबद्धताओं से पीछे न हट सके।