अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मज से अपने नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का बड़ा ऐलान किया है। इस भीषण अंतरराष्ट्रीय तनाव और नाकाबंदी के बीच भी भारत ने अपनी सूझबूझ से अपने जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। भारत सरकार ने इस ‘सीक्रेट’ रणनीति का खुलासा किया है कि कैसे खतरे के बीच भारतीय जहाज वहाँ से गुजरते रहे।
ट्रंप का सोशल मीडिया पर एलान
ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसेना पिछले महीने से ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकाबंदी को हटाएगी। ट्रंप ने कहा कि होर्मज के पास फँसे जहाज अब अपने घर लौट सकते हैं। अमेरिका इस इलाके से समुद्री बारूद (सी माइंस) को भी साफ करेगा।
क्यों लगी थी यह नाकाबंदी?
यह पूरा विवाद इसी साल 28 फरवरी को शुरू हुआ था। ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जंग छिड़ने के बाद ईरान ने इस रास्ते को बाधित कर दिया था। इसके बाद 13 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बनाने के लिए नाकाबंदी का आदेश दिया। होर्मज का यह रास्ता दुनिया के लिए बेहद जरूरी है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।
बंद रास्ते में भी निकले भारतीय जहाज
जब दुनिया की बड़ी-बड़ी शिपिंग कंपनियाँ इस रास्ते पर जाने से डर रही थीं, तब भी भारत के जहाज वहाँ से लगातार निकल रहे थे। ईरान के इस दबदबे वाले इलाके में भारतीय जहाजों का आना-जाना जारी रहा। इस वजह से भारत में ईंधन और जरूरी चीजों की सप्लाई पर कोई आँच नहीं आई। संकट के इस दौर में भी भारत वहाँ सबसे ज्यादा जहाज चलाने वाले देशों में शामिल रहा।
क्या है भारत की ‘सीक्रेट’ रणनीति?
भारत के जहाजों को सुरक्षित निकालने के पीछे सरकार की एक खास रणनीति थी। जहाजरानी मंत्रालय के अधिकारी ओपेश कुमार शर्मा ने बताया कि इसके लिए एक सीक्रेट प्लान पर काम हुआ। भारत ने विदेश मंत्रालय (MEA) के जरिए सीधे ईरान से तालमेल बिठाया। सरकार ने सुरक्षा कारणों से इस तालमेल की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
भारतीय जहाजों को निकालने के लिए देश के कई बड़े मंत्रालयों ने एक साथ काम किया। जहाजरानी मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय और उर्वरक (Fertilisers) मंत्रालय ने मिलकर एक लिस्ट तैयार की। इसमें तय किया गया कि किस जहाज को पहले निकालना सबसे जरूरी है। इसी प्राथमिकता के आधार पर एक-एक करके जहाजों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
अभी भी फँसे हैं भारत के 13 जहाज
सरकारी आँकड़ों के मुताबिक, इस तनाव वाले इलाके में अभी भी भारत के 13 जहाज मौजूद हैं। इनमें 5 कच्चे तेल के टैंकर, 1 एलपीजी टैंकर, 3 कंटेनर जहाज और कुछ अन्य जहाज शामिल हैं। शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी जैसे कई भारतीय जहाजों ने इस खतरे के बीच भी इस रास्ते को सफलतापूर्वक पार किया है।

