ट्रुथ सोशल पर ट्रंप ने मैक्रों के साथ अपनी चैट का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। मैसेज के मुताबिक, मैक्रों ने गुरुवार को पेरिस में दावोस के दौरान G7 मीटिंग करने का ऑफर दिया। उन्होंने कहा कि वह यूक्रेन, डेनमार्क, सीरिया और रूस के लोगों को भी मीटिंग में बुला सकते हैं।

मैक्रों के ऑफिस ने ट्रंप के पोस्ट किए गए स्क्रीनशॉट के असली होने की पुष्टि की है, लेकिन अमेरिका ने अब तक यह नहीं बताया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस के राष्ट्रपति को जवाब दिया है या नहीं।
इससे पहले, ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि वह फ्रांस के प्रेसिडेंट इमैनुएल मैक्रों पर अपने ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने का दबाव बनाने के लिए फ्रेंच वाइन और शैंपेन पर 200 परसेंट टैरिफ लगाएँगे। यह गाजा में शांति स्थापित करने के लिए बड़ा प्लान है।
मैक्रों ने गाजा के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने से मना किया
हालाँकि फ्रांस ने कहा है कि मैक्रों ने प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ में शामिल होने से मना कर दिया। बयान के मुताबिक, फ्रांस ने यह फैसला इसलिए लिया है क्योंकि उसे लगता है कि ट्रंप की अध्यक्षता वाली यह बॉडी गाजा पट्टी के ट्रांजिशनल गवर्नेंस से कहीं आगे तक शक्तियों का इस्तेमाल करेगी। इससे मौजूदा यूनाइटेड नेशंस कमजोर होगा।
मैक्रों का फैसला यूरोप की हलचल को दिखाता है। कई देश इस बात से परेशान हैं कि कैसे जवाब दें। ट्रंप को खुले तौर पर मना करने से अमेरिका के नाराज होने का खतरा है, लेकिन बिना बदलाव के शामिल होने पर सियासी नुकसान हो सकता है, इसलिए नेता वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं।
8300 करोड़ रुपए से ज्यादा की एंट्री फी
ट्रंप देशों से बोर्ड में परमानेंट मेंबरशिप के लिए $1 बिलियन यानी 8300 करोड़ रुपए से ज्यादा देने के लिए कह रहे हैं। व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि भी कर दी है। इस मांग ने कई नेता हैरान हैं। इनका कहना है कि यह फीस किस चीज़ को कवर करने के लिए है और पैसे को कौन कंट्रोल करेगा।
बोर्ड पर पिछले साल चर्चा हुई थी कि यह जंग खत्म होने के बाद गाज़ा को फिर से बनाने के लिए ट्रंप की लीडरशिप वाली बॉडी होगी। कनाडा के प्राइम मिनिस्टर मार्क कार्नी और तुर्की के प्रेसिडेंट रेसेप तैयप एर्दोगन सहित कई नेताओं को न्योता भेजा गया है। PM मोदी को भी ट्रंप से गाजा के ‘बोर्ड ऑफ़ पीस’ में शामिल होने का आधिकारिक न्योता भेजा है।

