अमेरिका के दो सीनेटरों ने भारत द्वारा अमेरिकी पीली मटर (येलो पीज) पर लगाए गए 30 प्रतिशत आयात शुल्क को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चिट्ठी लिखी है। उन्होंने कहा है कि यह शुल्क 1 नवंबर 2025 से लागू है, जिससे नॉर्थ डकोटा और मोंटाना राज्यों के दाल उगाने वाले किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। सीनेटरों ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने और भारत से बात करने की माँग की है, ताकि अमेरिकी किसानों को राहत मिल सके।
शुक्रवार (16 जनवरी 2025) को लिखे गए इस पत्र में सीनेटर केविन क्रैमर और स्टीव डेंस ने राष्ट्रपति ट्रंप से आग्रह किया है कि भारत के साथ होने वाले किसी भी समझौते में दाल फसलों से जुड़े अनुकूल प्रावधानों को शामिल कराने के लिए वे बातचीत करें।
पत्र में कहा गया है कि नॉर्थ डकोटा और मोंटाना अमेरिका में दालों के सबसे बड़े उत्पादक राज्य हैं, जबकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और वैश्विक स्तर पर कुल दाल खपत का 27 प्रतिशत से अधिक भारत में होता है। इसके बावजूद भारत ने 30 अक्टूबर को घोषणा की कि वह अमेरिका से आयात होने वाली पीली मटर पर 30 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा।
सीनेटरों के अनुसार यह टैरिफ 1 नवंबर से प्रभावी हो गया, जिसके चलते नॉर्थ डकोटा और मोंटाना के किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में गंभीर प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

सीनेटर केविन क्रैमर और स्टीव डेंस ने अपने पत्र में यह भी माँग की है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, भारत द्वारा दाल फसलों पर लगाए गए टैरिफ के मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत करें, ताकि अमेरिकी किसानों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सके।
पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि 2023 में भारत ने अमेरिकी दालों को लेकर कुछ राहत दी थी, जिससे अमेरिकी किसानों को फायदा हुआ था। लेकिन हालिया अमेरिकी टैरिफ नीतियों के कारण वह लाभ समाप्त हो गया है और अब भारत द्वारा अमेरिकी फसलों पर लगाए गए शुल्क का सीधा असर अमेरिकी किसानों पर पड़ रहा है।
यह भी उल्लेखनीय है कि भारत द्वारा 1 नवंबर 2025 से लगाया गया 30 प्रतिशत टैरिफ, अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत शुल्क के जवाब में उठाया गया कदम माना जा रहा है। अमेरिका ने यह टैरिफ भारत द्वारा रूस से तेल आयात जारी रखने के कारण लगाया था।
भारत द्वारा अमेरिकी मटर (पीज) पर लगाए गए इस 30 प्रतिशत जवाबी टैरिफ पर देश के भीतर मीडिया में ज्यादा चर्चा नहीं हुई। लेकिन अब जब सीनेटरों का यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, तो एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि भारत किस तरह व्यापार वार्ताओं में अपने हितों की रक्षा कर रहा है और ट्रंप द्वारा लगाए गए गलत टैरिफ का जवाब दे रहा है।
हाल ही में एक और घटनाक्रम ने भारत के रणनीतिक रुख को सामने ला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में अपनी हिस्सेदारी में 50.7 अरब डॉलर से अधिक की कटौती की है, जो बीते कुछ वर्षों में बढ़ते निवेश के रुझान के उलट एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
हालाँकि, अमेरिका और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार अब भी मजबूत बना हुआ है। नवंबर 2025 में इसमें सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके बावजूद दोनों देश अभी तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप नहीं दे पाए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्षों के बीच कड़ी और कठिन बातचीत जारी है।
2020 में भी ट्रम्प और मोदी की हुई थी बात
सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि उन्होंने उनके पहले कार्यकाल में भी भारत द्वारा लगाए गए टैरिफ के मुद्दे पर पत्र लिखा था। उस समय ट्रंप ने 2020 में भारत के साथ व्यापार बातचीत के दौरान वह पत्र खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया था, जिससे अमेरिकी किसानों को अपनी बात रखने का मौका मिला। सीनेटरों ने जोर दिया कि दालों पर टैरिफ के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत करने से अमेरिका के किसानों और भारत के उपभोक्ताओं दोनों को फायदा होगा।
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