उत्तर प्रदेश के वाराणसी में गंगा नदी में इफ्तार पार्टी के बाद चिकन बिरयानी खाने और जल में हड्डियाँ फेंकने के मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था। अब इस विवाद के बाद नाव संचालन से जुड़े नियमों को और सख्त किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार नावों के पंजीकरण और निगरानी के लिए एक नया पोर्टल भी शुरू करने जा रही है।
17 मार्च 2026 को इस मामले में 14 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया गया था। विवाद से पहले राज्य सरकार ने गंगा में चलने वाली नावों के पंजीकरण का अधिकार नगर निगम से लेकर परिवहन विभाग को दे दिया था। नगर निगम के रिकॉर्ड में फिलहाल 1,217 नावें पंजीकृत हैं।
नए पोर्टल के जरिए नाव मालिकों को अपनी नावों की पूरी जानकारी ऑनलाइन दर्ज करनी होगी। सरकारी सर्वेयर नावों की जाँच करेंगे और इसके बाद ही लाइसेंस जारी किया जाएगा।
नावों पर नॉनवेज, शराब और हथियारों पर रोक
गंगा में इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसके लिए नाव संचालकों ने भी अपनी तरफ से निगरानी बढ़ा दी है। नाव संचालकों के संगठन ‘माँ गंगा निषाद राज सेवा न्यास’ के अध्यक्ष प्रमोद मांझी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि पहले नावों पर क्या किया जा सकता है और क्या नहीं, इसे लेकर कोई स्पष्ट आचार संहिता नहीं थी।
लेकिन इस विवाद के बाद गंगा की पवित्रता बनाए रखने और प्रदूषण रोकने के लिए नए नियम लागू किए जा रहे हैं। नए नियमों के अनुसार नावों पर शराब, नशीले पदार्थ और किसी भी तरह का नॉनवेज खाना ले जाना या उसका सेवन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
नाव संचालकों को यह भी सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि यात्री प्लास्टिक की बोतलें, खाने के रैपर या अन्य कचरा गंगा में न फेंकें। इसके अलावा नावों पर कैमरे लगाने की भी सलाह दी गई है। नाव मालिकों को यह ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं कि नाव में तय सीमा से ज्यादा यात्री न बैठें और किसी तरह का झगड़ा या विवाद न होने पाए।
नावों पर हथियारों का प्रदर्शन भी प्रतिबंधित कर दिया गया है और तोड़ने वालों के खिलाफ संगठन की तरफ से कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारियों से शिकायत भी की जाएगी।
हर साल होगा नावों का रजिस्ट्रेशन, कोर्ट में जारी है मामला
वाराणसी के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि नावों के पंजीकरण के लिए नया पोर्टल जल्द शुरू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए जरूरी नियम और प्रक्रियाएँ तैयार की जा रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नावों का रजिस्ट्रेशन हर साल नवीनीकृत कराना अनिवार्य होगा।
दूसरी तरफ इफ्तार पार्टी मामले में गिरफ्तार किए गए 14 युवकों पर धार्मिक भावनाएँ आहत करने, पूजा स्थल को अपवित्र करने और जबरन वसूली जैसे आरोप लगाए गए हैं। आरोपितों की जमानत याचिका पहले निचली अदालत और सेशन कोर्ट से खारिज हो चुकी है। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 5 मई 2026 को होगी।

