भगवा हटाकर लगाया नीला झंडा, दोबारा झंडा लगाने पर पथराव: ACP समेत 7 पुलिसकर्मी घायल, वाराणसी पुलिस ने ‘बाहरी तत्वों’ को बताया जिम्मेदार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी के नेहिया गाँव में अंबेडकर जयंती (14 अप्रैल) पर भगवा झंडा हटाकर नीला झंडा लगाने से शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया है। इस मामले में शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को हालात इतने बिगड़ गए कि पत्थरबाजी शुरू हो गई जिसमें SP विदुष सक्सेना समेत 7 पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस को लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ना पड़ा। फिलहाल गाँव में भारी पुलिस बल तैनात है और स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।

झंडे से शुरू हुआ विवाद, हाईवे जाम तक पहुँचा मामला

गाँव के प्रवेश द्वार पर वर्षों से रामनवमी पर भगवा झंडा लगाया जाता रहा है। इस बार भी झंडा लगाया गया लेकिन अंबेडकर जयंती के दिन कुछ लोगों ने उसे हटाकर नीला झंडा लगा दिया। आरोप है कि अगले दिन हिंदू संगठन से जुड़े लोगों ने वह झंडा वहाँ से हटा दिया। इससे दलित समुदाय में नाराजगी फैल गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और विरोध प्रदर्शन करते हुए मोहाव-बाबतपुर मार्ग पर जाम लगा दिया।

गुरुवार को प्रशासन ने दोनों पक्षों की सहमति से मंदिर के गेट पर फिर से रामनवमी का भगवा झंडा लगवाकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। हालाँकि, अगले दिन हालात फिर बिगड़ गए।

बाहरी लोगों की एंट्री से बढ़ी हिंसा, पुलिस ने दर्ज की FIR

शुक्रवार (17 अप्रैल 2026) को अचानक बड़ी भीड़ गाँव में पहुँच गई, जिसमें बाहरी तत्वों की भूमिका भी बताई जा रही है। गोसाईगंज चौकी प्रभारी विपिन पांडेय ने कहा कि शुक्रवार को फिर भगवा झंडे लगे थे जिसे लेकर भीम आर्मी के लोग बवाल करने लगे। उन्होंने बताया कि पुलिस टीम की ओर से दोनों पक्षों को हटाया जा रहा था। इस दौरान पुलिस ने दलित समुदाय के लोगों को गेट के अंदर करना चाहा तो उधर से पथराव शुरू हो गया।

पुलिस ने 11 नामजद और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ दंगा, हत्या के प्रयास और सरकारी कार्य में बाधा जैसी धाराओं में केस दर्ज किया है। CCTV और वीडियो फुटेज के जरिए आरोपित की पहचान की जा रही है।

DCP प्रमोद कुमार के अनुसार, “माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। गाँव में PAC और कई थानों की फोर्स तैनात है।” प्रशासन लगातार फ्लैग मार्च कर रहा है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है।