वॉशिंगटन पोस्ट के CEO विल लुईस ने दिया इस्तीफा, छंटनी और असंतोष के बीच बोले जेफ बेजोस- अखबार मेरा दीर्घकालिक निवेश

वॉशिंगटन पोस्ट ने शनिवार (7 फरवरी 2026) को घोषणा की कि उसके CEO और प्रकाशक विल लुईस ने तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब 147 साल पुराना यह अखबार अपने इतिहास की सबसे बड़ी छंटनियों में से एक कर चुका है और फिलहाल गंभीर वित्तीय संकट, घटती पाठक संख्या तथा न्यूजरूम के कर्मचारियों के बढ़ते असंतोष का सामना कर रहा है।

लुईस ने कर्मचारियों को एक ईमेल के ज़रिए अपने फैसले की जानकारी दी, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके लिए आगे बढ़ने का यह सही समय है। उन्होंने अपने कार्यकाल को परिवर्तन का दौर बताया और कहा कि अखबार के दीर्घकालिक भविष्य की रक्षा के लिए कुछ कठिन फैसले लेने पड़े। यह ईमेल बाद में वॉशिंगटन पोस्ट के कई पत्रकारों द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया।

लुईस ने 2023 में वॉशिंगटन पोस्ट की कमान संभाली थी, जब उन्होंने लगभग एक दशक तक संगठन का नेतृत्व करने वाले फ्रेड रायन की जगह ली। पोस्ट से जुड़ने से पहले लुईस द वॉल स्ट्रीट जर्नल के प्रमुख रह चुके हैं और लंबे समय से ब्रिटेन और अमेरिका के मीडिया जगत से जुड़े रहे हैं।

अंतरिम नेतृत्व और बेजोस का बयान

लुईस के इस्तीफे के बाद, वॉशिंगटन पोस्ट ने अपने मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) जेफ डी’ओनोफ्रियो को नया कार्यवाहक सीईओ और प्रकाशक नियुक्त किया है। डी’ओनोफ्रियो हाल ही में पिछले साल ही कंपनी से जुड़े थे, ताकि इस कठिन दौर में अखबार का नेतृत्व संभाल सकें।

वॉशिंगटन पोस्ट के मालिक जेफ बेज़ोस हैं, जिन्होंने 2013 में इस अख़बार का अधिग्रहण किया था। बेज़ोस ने कहा कि पोस्ट उनके लिए एक दीर्घकालिक और पीढ़ीगत निवेश है। लुईस के जाने के बाद जारी एक बयान में बेजोस ने कहा कि पोस्ट के पास अब भी एक सशक्त पत्रकारिता मिशन है और आगे असाधारण अवसर मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि निकट भविष्य में अख़बार की दिशा पाठकों के प्रभाव से तय होगी।

गौरतलब है कि इस सप्ताह की शुरुआत में जब बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा की गई थी, तब हुई बैठक में न तो लुईस और न ही बेज़ोस ने कर्मचारियों से सीधे बात की। इस अनुपस्थिति से पत्रकारों में नाराजगी और बढ़ गई, जिनमें से कई ने हाल के हफ्तों में बेज़ोस को पत्र लिखकर उनसे नौकरी में बड़े पैमाने पर कटौती रोकने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की थी।

वाशिंगटन पोस्ट ने 300 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया

लुईस के इस्तीफे से कुछ ही दिन पहले, वॉशिंगटन पोस्ट ने पुष्टि की थी कि वह 300 से अधिक नौकरियों में कटौती कर रहा है, जो उसके कुल कर्मचारियों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है। इन छंटनियों का असर लगभग हर विभाग पर पड़ा, जिससे कवरेज में भारी कमी आई खासतौर पर खेल, स्थानीय रिपोर्टिंग और अंतरराष्ट्रीय समाचारों में।

अखबार का स्पोर्ट्स डेस्क पूरी तरह बंद कर दिया गया, स्थानीय रिपोर्टिंग टीमों में बड़ी कटौती की गई, और कई विदेशी ब्यूरो या तो बंद कर दिए गए या उनके काम को सीमित कर दिया गया। यहाँ तक कि मिडिल ईस्ट डेस्क सहित कुछ पूरी टीमों को भी हटा दिया गया।

कुछ पत्रकारों को सक्रिय संघर्ष क्षेत्रों में काम करते हुए ही नौकरी समाप्ति के ईमेल मिले। कार्यकारी संपादक मैट मरे ने कर्मचारियों को बताया कि अब अख़बार अमेरिका की राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल कंटेंट पर अधिक ध्यान केंद्रित करेगा, और न्यूजरूम में लगभग 500 कर्मचारियों की टीम रखी जाएगी।

इन छंटनियों का असर अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों पर भी पड़ा, जिनमें भारत और मिडिल ईस्ट में तैनात वरिष्ठ संवाददाता शामिल हैं। इनमें से कई ने सोशल मीडिया पर भावुक विदाई संदेश साझा किए।

एक विवादित कार्यकाल का उथल-पुथल भरा अंत

वॉशिंगटन पोस्ट में लुईस का कार्यकाल गंभीर वित्तीय दबाव और बार-बार उभरते आंतरिक संकटों से घिरा रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, अखबार को हर साल करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा था, जो एक समय लगभग 100 मिलियन डॉलर तक पहुँच गया था। संपादकीय दिशा और ओपिनियन पेज में बदलाव के बाद सब्सक्राइबर संख्या में भी तेज गिरावट आई, जिससे कुछ ही महीनों में लाखों सदस्यता रद्द हो गईं।

न्यूज़रूम का मनोबल लगातार गिरता गया, क्योंकि पत्रकार नेतृत्व के फैसलों, घटती वैश्विक कवरेज और अखबार की भविष्य की दिशा को लेकर चिंता जताते रहे। कई वरिष्ठ पत्रकारों ने सार्वजनिक रूप से शीर्ष स्तर पर लिए गए फैसलों की आलोचना की और कहा कि इनसे पोस्ट की दीर्घकालिक चुनौतियाँ और गंभीर हो गईं।

अब लुईस के जाने और डी’ओनोफ्रियो के अंतरिम प्रमुख बनने के बाद, वॉशिंगटन पोस्ट के सामने कर्मचारियों और पाठकों का भरोसा दोबारा हासिल करने, वित्तीय स्थिति को स्थिर करने और तेजी से बदलते मीडिया परिदृश्य में अपनी पहचान को नए सिरे से परिभाषित करने की बड़ी चुनौती है, वह भी अमेरिका के सबसे प्रभावशाली अखबारों में से एक के रूप में अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखते हुए।