‘लाखों लोगों को बुलाकर जुलूस निकलवा दूँगी’: CM ममता ने दिल्ली आकर EC के सामने किया हाई-वोल्टेज ड्रामा; सुरक्षा के नाम पर बंगाल से ‘स्पेशल फोर्स’ बुलाई

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर दिल्ली में संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार (2 फरवरी 2026) को एसआईआर (SIR) मुद्दे पर चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात के दौरान ममता बनर्जी ने न केवल मेज पर हाथ पटका, बल्कि अधिकारियों को खुली धमकी भी दे डाली।

ममता बनर्जी ने गुस्से में कहा, “मैं लाखों लोगों को दिल्ली लाकर चुनाव आयोग के सामने जुलूस निकलवा सकती हूँ।” ममता बनर्जी ने आयोग पर भाजपा के इशारे पर काम करने का आरोप लगाते हुए उसे ‘अहंकारी’ और ‘झूठा’ करार दिया। इस बीच, दिल्ली पुलिस की सुरक्षा पर भरोसा न जताते हुए ममता ने कोलकाता से अपनी स्पेशल फोर्स और आरएएफ (RAF) की टुकड़ी भी दिल्ली बुला ली है।

चुनाव आयोग में बदसलूकी और बहिष्कार

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग के दफ्तर में हुई बैठक में ममता बनर्जी और उनके साथ आए TMC नेताओं का व्यवहार बेहद आक्रामक रहा। ममता बनर्जी काले शॉल ओढ़कर विरोध जताने पहुँची थीं, लेकिन बातचीत के दौरान उन्होंने आपा खो दिया और बैठक बीच में ही छोड़कर बाहर आ गईं।

ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त तक को ‘बीजेपी का एजेंट‘ कह डाला। वहीं, आयोग के अधिकारियों ने ममता को याद दिलाया कि बंगाल में TMC कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग की इमारतों में तोड़फोड़ की है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता की इस दिल्ली यात्रा को पूरी तरह ‘ड्रामेबाजी’ करार दिया है।

दिल्ली में अपनी ‘प्राइवेट सेना’ की तैनाती

हैरानी की बात यह है कि देश की राजधानी में दिल्ली पुलिस के कड़े सुरक्षा घेरे के बावजूद, ममता बनर्जी ने कोलकाता से डीएसपी रैंक के अधिकारी और 22 सदस्यीय आरएएफ (RAF) की टुकड़ी को विमान से दिल्ली बुलाया है।

बंग भवन की सुरक्षा को अचानक ‘बुलेटप्रूफ’ करने की इस कोशिश पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ममता को किस बात का डर सता रहा है? मंगलवार (3 फरवरी 2026) को भी दिल्ली में गहमागहमी रहने वाली है, क्योंकि ममता बनर्जी बंग भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगी और शाम को टीएमसी सांसदों के साथ ‘हाई-टी’ पार्टी करेंगी।

संविधान और संस्थाओं पर सीधा हमला

ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग के बाहर मीडिया से बात करते हुए बेहद कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ‘आयोग के लोग ऐसे बात करते हैं जैसे वे जमींदार हों और हम उनके नौकर।’ उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग केवल बंगाल और केरल को निशाना बना रहा है जबकि असम में चुप है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से पहले ममता बनर्जी जानबूझकर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम कर ‘विक्टिम कार्ड’ खेलने की कोशिश कर रही हैं।