बंगाल की जिन मुस्लिम जातियों पर मेहरबान थी ममता, वे अब नहीं खा सकेंगी OBC का कोटा: BJP सरकार ने बदला आरक्षण का गणित, इमामों का भत्ता भी कर चुकी है बंद

बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण सूची और नियम में बदलाव किए हैं। इसके तहत राज्य में ओबीसी आरक्षण 17 फीसद से घटाकर 7 फीसद कर दिया गया है।

शुभेंदु सरकार ने यह निर्णय नई 2024 में आए कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के मद्देनजर लिया। उस फैसले में कोर्ट ने साफ कहा था कि राज्य में केवल 7 परसेंट ओबीसी कोटा वैध होगा, जिसके तहत कुल 66 कैटेगरी ही रिजर्वेशन की हकदार होंगी।

अब बंगाल में भाजपा सरकार आने के बाद इस फैसले को सम्मान दिया गया है। इससे पहले राज्य में तृणमूल कॉन्ग्रेस थी। उन्होंने अपनी राजनीति करने के लिए ओबीसी आरक्षण को भी दो श्रेणियों में विभाजित किया था।

एक ओबीसी-ए जिसमें 49 जाति समूह थे और दूसरा ओबीसी-बी जिसमें 91 कास्ट ग्रुप जोड़े गए थे। इनके तहत 10 फीसद और 7 फीसद आरक्षण दिया जाता था।

ममता सरकार ने आरक्षण सूची को विस्तार देने की आड़ में कई मुस्लिम जातियों को ओबीसी सूची में शामिल कर लिया था। हालाँकि भाजपा सरकार ने अब 10 परसेंट दिए जाने वाले आरक्षण की श्रेणी को समाप्त कर दिया है। राज्य में कुल ओबीसी कोटा केवल 7 फीसद ही रहेगा।

शुभेंदु अध‍िकारी सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए सूचित किया कि 2010 से पहले की जो ओबीसी सूची है, अब वही लागू होगी उसी आधार पर आगे भी नौकर‍ियों और श‍िक्षण संस्‍थानों में आरक्षण मिलेगा। उस वक्त भी 66 जातियों या वर्गों को ही सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 7% आरक्षण का लाभ देने का प्रावधान था।

बता दें कि 2 दिन पहले ही शुभेंदु सरकार ने बंगाल में बड़ा फैसला लेते हुए मजहब के आधार पर दिए जाने वाले सभी सरकारी भत्तों और आयोजनों को बंद करने का ऐलान किया था। सरकार ने कहा था कि सूचना एवं संस्कृति विभाग और अल्पसंख्यक मामलों और मदरसा शिक्षा विभाग के तहत जो योजनाएँ धर्म के आधार पर चलाई जा रही थीं, उन्हें अब खत्म किया जाएगा। वरना ममता सरकार में इस आधार पर भी मुस्लिमों को खुश करने के काम हो रहे थे। मजहब के नाम पर इमामों को 3000 रुपए दिए जाते थे वहीं आजान देने वाले मुअज्जिन भी 1500 रुपए पाते थे।