मालदा बाढ़ के नाम पर ममता सरकार में ₹100 करोड़ का भ्रष्टाचार, CAG ने सुप्रीम कोर्ट को दी 700 पन्नों की रिपोर्ट: पीड़ितों तक नहीं पहुँचा पैसा, एक व्यक्ति को दिया 42 बार मुआवजा

पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार पर भ्रष्टाचार का एक बड़ा बम फूटा है। सरकारी ऑडिट संस्था CAG ने सुप्रीम कोर्ट में 700 पन्नों की रिपोर्ट सौंपकर बताया है कि 2017 की मालदा बाढ़ के दौरान जनता की गाढ़ी कमाई के ₹100 करोड़ का गबन किया गया है। ममता सरकार ने राहत के नाम पर पैसा उन लोगों को बाँट दिया जो इसके हकदार नहीं थे, जबकि असली पीड़ित आज 9 साल बाद भी दाने-दाने को मोहताज हैं।

ममता सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

CAG की जाँच में सीधा आरोप लगाया गया है कि ममता सरकार के शासन में बाढ़ राहत कोष का इस्तेमाल जरूरतमंदों की मदद के बजाय लूट-खसोट के लिए किया गया। मालदा जिले के 12 ब्लॉकों में सरकारी खजाने से करोड़ों रुपए निकाले गए, लेकिन वे पीड़ितों तक पहुँचे ही नहीं।

इस पूरे खेल में नियमों को ताक पर रखकर चहेते लोगों की जेबें भरी गईं और जब हिसाब माँगा गया तो अधिकारियों ने दस्तावेज गायब होने का बहाना बना दिया।

एक ही शख्स पर मेहरबानी: 42 बार मिला पैसा

भ्रष्टाचार का सबसे हैरान करने वाला उदाहरण हरिश्चंद्रपुर-II ब्लॉक में दिखा। यहाँ एक ही व्यक्ति को उसके एक ही नुकसान के लिए 42 बार मुआवजा दे दिया गया। इतना ही नहीं, जहाँ आम पीड़ित को ₹17,600 मिलने चाहिए थे, वहाँ सेटिंग वाले लोगों के खातों में औसतन ₹70,000 भेजे गए। हद तो तब हो गई जब एक ही शख्स के खाते में अलग-अलग किश्तों में कुल ₹5.90 करोड़ डाल दिए गए।

कागजों पर ‘तबाह’ हुए पक्के मकान

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 1609 पक्के मकान ऐसे थे जिन्हें बाढ़ से कोई नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन कागजों पर उन्हें ‘क्षतिग्रस्त’ दिखाकर ₹7.5 करोड़ हड़प लिए गए। प्रशासन ने बिना किसी जाँच-पड़ताल के यह पैसा जारी कर दिया।

इसी तरह, 71,000 कच्चे मकानों के नाम पर भारी-भरकम फंड निकाला गया और उन लोगों को बाँट दिया गया जिनका पीड़ितों की सूची में नाम तक नहीं था।

नेताओं और अफसरों की मिलीभगत

बाढ़ के पैसे को लूटने में पंचायत के प्रतिनिधि भी पीछे नहीं रहे। 36 पंचायत समिति सदस्यों और सरकार से सैलरी लेने वाले 72 ग्राम पंचायत सदस्यों ने खुद को ही ‘बाढ़ पीड़ित’ बताकर सरकारी पैसा अपनी जेब में डाल लिया।

पीड़ितों के वकील अनिंद्य घोष का कहना है कि उन्होंने उन 30 BDO (ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) के नाम उजागर किए हैं, जो इस घोटाले के समय उन इलाकों में तैनात थे और जिनकी नाक के नीचे यह सब हुआ।