Monday, April 19, 2021
Home देश-समाज बिन बुर्क़े बाहर जाओगी तो हल्ला मच जाएगा: आईसिस ने यज़ीदी सेक्स स्लेव से...

बिन बुर्क़े बाहर जाओगी तो हल्ला मच जाएगा: आईसिस ने यज़ीदी सेक्स स्लेव से यही कहा

आज का विश्व आँख मूँद कर इस आतंक को 'आतंक का कोई रिलीजन नहीं होता' कहते हुए शुतुरमुर्ग की तरह नकार रहा है। उनके झंडे पर उनके मज़हब का नारा बुलंद है, उनके कुकर्मों से पहले 'अल्लाह' के नाम का जयघोष होता है, और आप कहते हैं कि आतंक का कोई मज़हब नहीं होता!

इस्लामी आतंकियों और सेक्स कुंठा से भरे समाज के कई हिस्सों के बारे में जब कुछ बातें सामने आती हैं तो आश्चर्य होता है कि विरोधाभास और विडम्बना कहाँ तक जा सकती हैं। कल एक वीडियो सामने आया जहाँ यज़ीदी महिलाएँ, जो आईसिस द्वारा सेक्स स्लेव के रूप में हर दिन बलात्कार का शिकार होती रहीं थीं, बुर्कों को जला रही थीं।

इसके पीछे का कारण यह था कि आईसिस इस्लाम के उन तौर तरीक़ों में पूरी आस्था दिखाता है जो उसकी मर्ज़ी के हों। जैसे कि बुर्क़ा पहनना चाहिए, काफ़िरों को काट देना चाहिए, उन्हें बमों से उड़ा देना चाहिए, बलात्कार करना चाहिए आदि। बुर्क़ा पहनने के पीछे जो क्यूट कारण बताते हैं ये आतंकवादी, वो सुनकर कान से ख़ून निकल आता है, “ऐसे बाहर मत निकलो। मर्दों के आस-पास ऐसे मत दिखना।”

अब आप कहिए ‘वॉव, जस्ट फकिंग वॉव!’ 

शब्दों के लिए माफ़ी नहीं माँगूँगा क्योंकि ये सब जानने के बाद और कोई प्रतिक्रिया निकल नहीं पाती। पिछले सप्ताह कई सेक्स स्लेव (बलात्कार करने हेतु ग़ुलाम बनाई गई युवतियाँ और बच्चियाँ) इन आतंकियों के चंगुल से बाहर निकलकर आईं और रेगिस्तान में पंक्तिबद्ध खड़े होकर अपने बुर्क़ो को आग लगाया। हम या आप इन लड़कियों के अनुभव को समझ नहीं कर सकते क्योंकि इनकी यातना शरीर और दिमाग से परे इनकी निश्छल आत्माओं तक है। ये घाव हर स्तर पर गहरे हैं, और इनकी जिजीविषा से हम बहुत कुछ सीख सकते हैं।

इस वीडियो में एक यज़ीदी लड़की कहती है, “जब उन्होंने पहली बार मुझे वह (बुर्क़ा) पहनने के लिए विवश किया, तो मुझे अपना दम घुटता सा लगा। मुझे उसमें काफ़ी परेशानी हो रही थी। मैं बुर्क़ा पहनना नहीं चाहती थी पर उन्होंने इसे उतारने की अनुमति नहीं दी। वो कहते थे कि हर कोई पहन रहा है। जब भी मैं अकेली होती थी तो उसे उतार फेंकती थी। वह कहते थे, ‘ऐसे बाहर मत निकलो।’ ‘मर्दों के आस-पास ऐसे मत दिखना।’ पर जब भी वे मुझे अकेले में छोड़ते थे, मैं उसे उतार देती थी। अब मैं (यहाँ) आ गई हूँ और इसे उतार दिया है, और जला दिया है। यह क़िस्सा ख़त्म कर दिया है, ईश्वर की कृपा से। काश मैं दएश (आईसिस) को यहाँ ला पाती और जला पाती, जैसे मैंने अपने उन कपड़ों को जला दिया है।”

यजीदी लड़कियाँ बता रही हैं आपबीती

इस विचारधारा की जड़ में इस्लाम को दुनिया पर स्थापित करने की पुरानी ज़िद है। लेकिन आज का विश्व आँख मूँद कर इस आतंक को ‘आतंक का कोई रिलीजन नहीं होता’ कहते हुए शुतुरमुर्ग की तरह नकार रहा है। उनके झंडे पर उनके मज़हब का नारा बुलंद है, उनके कुकर्मों से पहले ‘अल्लाह’ के नाम का जयघोष होता है, और आप कहते हैं कि आतंक का कोई मज़हब नहीं होता!

एक तरफ इस्लाम को स्थापित करने की चाह, एक तरफ बुर्क़ा पहनाकर महिलाओं को यह बताना कि मर्दों के आस-पास शरीर को ढक कर रखना चाहिए, और दूसरी तरफ बलात्कार? दिन-रात बलात्कार कर रहे हों और ज्ञान दे रहे हो कि बाहर बुर्क़े में रहा करो क्योंकि मर्दों के सामने ऐसे नहीं जाना चाहिए! ये उच्च क़िस्म का घटिया नशा है जो शायद इन्होंने एक साथ सीरिया के किसी कच्चे तेल के कुएँ से पीकर पाया होगा, क्योंकि लॉजिक तो घास ही चरता दिख रहा है! 

ऐसे ही एक वीडियो देखा था जिसमें कई महिलाएँ (अलग-अलग जगहों पर) हिजाब पहनकर, कई अरबी/ इस्लामी कपड़ों में बैठे मर्दों के बीच उत्तेजक नृत्य कर रही थी। मैं कपड़ों का ज़िक्र कर रहा हूँ क्योंकि वीडियो से मज़हब का पता लगाना मुश्किल है। अंग्रेज़ी में इसे सिडक्टिव डान्स कह सकते हैं। क़ालीन बिछा हुआ है, मर्द घेरे पड़े हैं, टोपियाँ सर पर हैं, लड़की ने हिजाब से सर ढक रखा है और उसके कूल्हे थिरक रहे हैं। ये विचित्र स्तर का मानसिक दिवालियापन है कि सेक्सी नाच भी देखना है, और लड़की के संस्कार भी क़ायम रखने हैं। आप यूट्यूब पर वो वीडियो ख़ुद ढूँढ लीजिए क्योंकि वो इतना घटिया है कि मैं यहाँ रख नहीं सकता।

मतलब, समाज और मज़हबी जानकार कहते हैं कि महिला को सर ढक कर रखना चाहिए। इसलिए गर्दन से नीचे टू-पीस बिकिनी चलेगा, सेक्सी नाच चलेगा लेकिन सर तो ढका ही होना चाहिए क्योंकि मौलवी जी ने कहा है! ऐसे उदाहरणों पर आप न तो हँस सकते हैं, न गम्भीर हो सकते हैं। हँस इसलिए नहीं सकते कि हर व्यक्ति की भावनाएँ होती हैं, जज़्बात होते हैं, उन्हें उत्तेजक नृत्य देखना ज़रूरी लगता है, तो वो अपने मज़हबी बातों से रास्ता निकाल कर अपनी इच्छा की पूर्ति करते हैं।

गम्भीर इसलिए नहीं हो सकते कि आख़िर ये हो क्या रहा है! देखना है तो पूरा देख लो ठीक से कि नाचने वाली महिला ही है या किसी ने बुर्क़ा पहनकर पागल तो नहीं बनाया! ये कैसी मानसिकता है जिससे एक तरफ तो मज़हब का भी सम्मान हो रहा है और दूसरी तरफ अपनी ठरक का भी। जी, सही शब्द ‘ठरक’ ही है क्योंकि किसी महिला को उस तरह से घेरकर नचाना आपकी कुंठा की परिणति ही है, न कि आपके अंदर बैठा कला-प्रेमी जाग गया है।

ये इस विचारधारा का सत्य है। जो भी ऐसे आतंकियों के विरोध में नहीं हैं, वो इन्हें सहमति देने वाले हैं। क्योंकि किसी मसीहा और दूत के नाम पर बलात्कार, क़त्ल, ग़ुलामी आदि को जायज़ बताने को धिक्कार नहीं पाना बताता है कि आप भीतर से क्या चाहते हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अजीत भारती
पूर्व सम्पादक (फ़रवरी 2021 तक), ऑपइंडिया हिन्दी

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘F@#k Bhakts!… तुम्हारे पापा और अक्षय कुमार सुंदर सा मंदिर बनवा रहे हैं’: कोरोना पर घृणा की कॉमेडी, जानलेवा दवाई की काटी पर्ची

"Fuck Bhakts! इस परिस्थिति के लिए सीधे वही जिम्मेदार हैं। मैं अब भी देख रहा हूँ कि उनमें से अधिकतर अभी भी उनका (पीएम मोदी) बचाव कर रहे हैं।"

ग्रीन कॉरिडोर बनाकर ‘ऑक्सीजन एक्सप्रेस’ चलाएगी रेलवे, उद्योगों की आपूर्ति पर रोक: टाटा स्टील जैसी कंपनियाँ भी आईं आगे

ऑक्सीजन की कमी को दूर करने के लिए रेलवे ने विशेष ट्रेन चलाने का फैसला किया है। कई स्टील कंपनियों ने प्लांट की ऑक्सीजन की आपूर्ति अस्पतालों को शुरू की है।

‘बीजेपी को कोसने वाले लिबरल TMC पर मौन’- हर दिन मेगा रैली कर रहीं ममता लेकिन ‘ट्विटर’ से हैं दूर: जानें क्या है झोल

ममता बनर्जी हर दिन पश्चिम बंगाल में हर बड़ी रैलियाँ कर रही हैं, लेकिन उसे ट्विटर पर साझा नहीं करतीं हैं, ताकि राजनीतिक रूप से सक्रीय लोगों के चुभचे सवालों से बच सकें और अपना लिबरल एजेंडा सेट कर सकें।

क्या जनरल वीके सिंह ने कोरोना पीड़ित अपने भाई को बेड दिलाने के लिए ट्विटर पर माँगी मदद? जानिए क्या है सच्चाई

केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने ट्विटर पर एक नागरिक की मदद की। इसके लिए उन्होंने ट्वीट किया, लेकिन विपक्ष इस पर भी राजनीति करने लगा।

‘कॉन्ग्रेसी’ साकेत गोखले ने फैलाया झूठ: रेमडेसिविर की आपूर्ति पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा ब्रुक फार्मा के निदेशक के उत्पीड़न का किया बचाव

कॉन्ग्रेस समर्थक साकेत गोखले ने एक बार फिर से फेक न्यूज फैलाने का काम किया है। गोखले ने बेबुनियाद ट्वीट्स की सीरीज में आरोप लगाया कि भाजपा ने महाराष्ट्र में अपने पार्टी कार्यालय में 4.75 करोड़ रुपए की रेमडेसिविर (Remdesivir) की जमाखोरी की है।

दूसरी लहर सँभल नहीं रही, ठाकरे सरकार कर रही तीसरी की तैयारी: महाराष्ट्र के युवराज ने बताया सरकार का फ्यूचर प्लान

महाराष्ट्र के अस्पतालों में न सिर्फ बेड्स, बल्कि वेंटिलेटर्स और ऑक्सीजन की भी भारी कमी है। दवाएँ नहीं मिल रहीं। ऑक्सीजन और मेडिकल सप्लाइज की उपलब्धता के लिए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भारतीय सेना से मदद के लिए गुहार लगाई है।

प्रचलित ख़बरें

‘वाइन की बोतल, पाजामा और मेरा शौहर सैफ’: करीना कपूर खान ने बताया बिस्तर पर उन्हें क्या-क्या चाहिए

करीना कपूर ने कहा है कि वे जब भी बिस्तर पर जाती हैं तो उन्हें 3 चीजें चाहिए होती हैं- पाजामा, वाइन की एक बोतल और शौहर सैफ अली खान।

SC के जज रोहिंटन नरीमन ने वेदों पर की अपमानजनक टिप्पणी: वर्ल्ड हिंदू फाउंडेशन की माफी की माँग, दी बहस की चुनौती

स्वामी विज्ञानानंद ने SC के न्यायाधीश रोहिंटन नरीमन द्वारा ऋग्वेद को लेकर की गई टिप्पणियों को तथ्यात्मक रूप से गलत एवं अपमानजनक बताते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणियों से विश्व के 1.2 अरब हिंदुओं की भावनाएँ आहत हुईं हैं जिसके लिए उन्हें बिना शर्त क्षमा माँगनी चाहिए।

ईसाई युवक ने मम्मी-डैडी को कब्रिस्तान में दफनाने से किया इनकार, करवाया हिंदू रिवाज से दाह संस्कार: जानें क्या है वजह

दंपत्ति के बेटे ने सुरक्षा की दृष्टि से हिंदू रीति से अंतिम संस्कार करने का फैसला किया था। उनके पार्थिव देह ताबूत में रखकर दफनाने के बजाए अग्नि में जला देना उसे कोरोना सुरक्षा की दृष्टि से ज्यादा ठीक लगा।

रोजा वाले वकील की तारीफ, रमजान के बाद तारीख: सुप्रीम कोर्ट के जज चंद्रचूड़, पेंडिग है 67 हजार+ केस

जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिककर्ता के वकील को राहत देते हुए एसएलपी पर हो रही सुनवाई को स्थगित कर दिया।

Remdesivir का जो है सप्लायर, उसी को महाराष्ट्र पुलिस ने कर लिया अरेस्ट: देवेंद्र फडणवीस ने बताई पूरी बात

डीसीपी मंजूनाथ सिंगे ने कहा कि पुलिस ने किसी भी रेमडेसिविर सप्लायर को गिरफ्तार नहीं किया है बल्कि उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया था, क्योंकि...

‘पंडित मुक्त’ गाँव वाला वीडियो वायरल होने के बाद भाजपा नेता सुहैल पाशा ने दिया पार्टी से इस्तीफा

हिंदू विरोधी वीडियो वायरल होने के बाद उत्तराखंड के देहरादून से भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा के पूर्व जिलाध्यक्ष सुहैल पाशा ने पार्टी से...
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,985FansLike
82,233FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe