Wednesday, December 7, 2022
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14000 खातों से गायब हुई कर्ज़ माफ़ी की रकम: किसानों ने कहा – कॉन्ग्रेस-JDS ने हमें बनाया बेवकूफ

कर्नाटक के जिन 13,988 किसानों के खाते से पैसा गायब हुआ है, उनका कहना था कि उन्हें चुनावी मौसम में लुभाने के लिए ही यह कर्ज-माफ़ी हुई थी। अपने मन-मुताबिक वोट नहीं पड़े तो रकम वापिस ले ली गई।

लोकसभा में अपनी बुरी तरह हुई शिकस्त के बाद एचडी कुमारास्वामी की कॉन्ग्रेस-जेडीएस सरकार को एक और शर्मनाक स्थिति से दो-चार होना पड़ रहा है। जिन किसानों को विधानसभा घोषणा-पत्र के मुताबिक सरकार बनने के बाद कर्ज-माफ़ी की ‘सौगात’ मिली थी, उनमें से भारी संख्या में किसान, खाते में से रकम ‘ग़ायब’ हो जाने की शिकायत कर रहे हैं। क़रीब 14,000 किसानों ने यह शिकायत की है कि उनके खाते में कर्ज-माफ़ी के नाम पर जमा रकम कॉन्ग्रेस-जेडीएस गठबंधन के लोकसभा निर्वाचन में विफल रहने के बाद उनके खातों से गायब हो गई। वहीं, कुमारास्वामी ने इसका ठीकरा मोदी सरकार के द्वारा नियंत्रित राष्ट्रीयकृत बैंकों के सर पर फोड़ा है।

लॉलीपॉप दिया था, वोट नहीं मिले तो वापिस ले लिया

कर्नाटक के जिन 13,988 किसानों के खाते से पैसा गायब हुआ है, उनका कहना था कि उन्हें चुनावी मौसम में लुभाने के लिए ही यह कर्ज-माफ़ी हुई थी। अपने मन-मुताबिक वोट नहीं पड़े तो रकम वापिस ले ली गई। यादगीर जिले के सागर में रहने वाले 60-वर्षीय शिवप्पा के खाते में इसी अप्रैल में ₹43,553 आए थे, लेकिन 3 जून को वह रकम शिवप्पा के खाते से गायब हो गई

‘केंद्र के अंतर्गत राष्ट्रीयकृत बैंकों के खातों में ही हो रही गड़बड़ी’

मुख्यमंत्री कुमारास्वामी ने इसे विपक्ष का फैलाया जा रहा झूठ और भ्रम बताते हुए कहा कि उन्होंने 14 जून को राष्ट्रीयकृत बैंकों के प्रतिनिधियों को मीटिंग के लिए बुलाया है। इसके अलावा कर्ज-माफ़ी के निष्पादन के लिए उत्तरदाई मुनीश मुद्गिल, जो सर्वेक्षण, चकबंदी और भूमि अभिलेख विभाग के आयुक्त हैं, ने भी कुमारास्वामी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि गड़बड़ी राष्ट्रीयकृत बैंकों के खातों में ही हो रही है, जहाँ 12 लाख किसानों ने कर्ज-माफ़ी के लिए आवेदन किया था। उन्होंने यह भी जोड़ा कि राज्य सरकार ने 7.5 लाख कर्ज-माफ़ी के लिए योग्यता की शर्तें पूरी करने के ₹3,930 करोड़ माफ़ भी किए हैं। यह कदम बैंकों द्वारा दिए गए डेटा की पूरी पड़ताल के बाद ही उठाया गया है।

इसके बाद मुद्गिल ने यह भी दावा कर दिया है कि एक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार जिन 13,988 खातों से पैसे गायब हुए हैं, वह उन किसानों के हैं जो इस योजना के लिए तो अयोग्य थे लेकिन उनके खाते में धनराशि फिर भी स्थानांतरित हो गई। बैंकों को ऐसे खातों में जमा किए गए ₹60 करोड़ (लगभग) वसूलने के निर्देश दिए गए हैं

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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