J&K में BJP को मिला अब तक का सर्वाधिक वोट शेयर: राज्य भाजपा ने कहा 370 हटाओ

भाजपा ने अपनी चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था केंद्र में वापस सरकार आने पर वो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म कर देगी। अब राज्य संगठन स्तर पर यह माँग उठने लगी है।

लोकसभा चुनाव में भाजपा की जबर्दस्त जीत के बाद जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 को ख़त्म करने की माँग तेज़ी से जोर पकड़ने लगी है। राज्य के भाजपा संगठन का कहना है कि यहाँ की जनता ने राज्य से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के लिए ही पीएम मोदी के पक्ष में वोट किया है तो अब समय आ गया है कि इस दिशा में कदम उठाते हुए अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष दर्जे को समाप्त करने की प्रक्रिया पर अंतिम निर्णय लिया जाए। दरअसल, भाजपा ने अपनी चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था केंद्र में वापस सरकार आने पर वो जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को खत्म कर देगी।

गौरतलब है कि, राज्य में भाजपा की जीत के बाद पूर्व सीएम और श्रीनगर के सांसद फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार (मई 24, 2019) को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा था कि 2019 के चुनाव में भले ही भाजपा को बड़ी जीत है, मगर वो राज्य से विशेष दर्जे को खत्म नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि वो चाहे कितने भी शक्तिशाली क्यों ना हो जाएँ, लेकिन राज्य से इसे नहीं हटाया जा सकता। अब्दुल्ला के इस बयान के बाद राज्य के भाजपा संगठन ने इसे हटाने की माँग तेज कर दी है।

बता दें कि जम्मू कश्मीर में भाजपा ने अपना सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। भाजपा ने न केवल 46.39% मत प्राप्त किया बल्कि 27 विधानसभा सीटों पर भी उसका मत प्रतिशत सर्वाधिक रहा है। यह 2014 के निर्वाचन में पाए 32% मतों से 12% अधिक है।

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राज्यमंत्री रहे डॉ. जितेंद्र सिंह ऊधमपुर में विजयी हुए हैं और उन्होंने राज्य के भूतपूर्व शाही परिवार के राजकुमार विक्रमादित्य सिंह को हराया है। साढ़े तीन लाख वोटों से अधिक की उनकी जीत राज्य में किसी भी प्रत्याशी की जीत से बड़ी है। पार्टी के जुगल किशोर ने जम्मू में 58.02% मतों के साथ जीत दर्ज की है, और लद्दाख से जामयांग त्सेरिंग नामग्याल लगभग 34% मतों के साथ विजयी हुए हैं।

फारूख अब्दुल्ला के बयान पर भाजपा की राज्य इकाई के प्रवक्ता ब्रिगेडियर (सेवानिवृत) अनिल गुप्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के पास अनुच्छेद 35ए और 370 को लेकर बड़े-बड़े दावे करने के लिए जम्मू और लद्दाख का जनादेश नहीं है क्योंकि उन्हें जम्मू और लद्दाख की जनता का वोट नहीं मिला है। उनके पास सिर्फ घाटी की सीटें हैं। इसके साथ ही अनिल गुप्ता ने अब्दुल्ला को निशाने पर लेते हुए कहा कि ये घाटी में शांति की माँग तो करते हैं, मगर साथ ही इनकी पार्टी आफस्पा हटाने और जमात-ए-इस्लामी पर बैन हटाने की भी माँग रखती है। अब आतंक के अंत और उसके नेटवर्क को समाप्त किए बिना राज्य में शांति की स्थापना कैसे हो सकती है, ये तो अब्दुल्ला ही बता सकते हैं। 

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