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वकीलों के खिलाफ FIR की अनुमति नहीं: हाई कोर्ट ने ठुकराई दिल्ली पुलिस की याचिका

बार काउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने बड़ा बयान दिया है। काउन्सिल ने दिल्ली पुलिस के हड़ताली कर्मचारियों को 'बेकाबू भीड़' बताते हुए उन पर 'भद्दे' नारे लगाने का आरोप लगाया और साथ ही पूरे मामले के राजनीति से प्रेरित होने का शक जताया।

वकीलों और पुलिस के बीच दिल्ली में पिछले चार दिनों से चल रहे संघर्ष में एक बड़ा फैसला देते हुए कोर्ट ने वकीलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति देने से इंकार कर दिया है। यह फैसला अदालत ने साकेत कोर्ट वाली घटना में दिया है, जिसके एक चर्चित वीडियो में कुछ वकील एक पुलिस वाले के साथ हाथापाई करते देखे जा सकते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने 3 नवंबर के अपने आदेश के बारे में कोई स्पष्टीकरण देने से भी इंकार करते हुए उसे स्वतः स्पष्ट (सेल्फ एक्सप्लनेटोरी) बताया है

इसके अलावा बार काउन्सिल ऑफ़ इंडिया ने बड़ा बयान दिया है। काउन्सिल ने दिल्ली पुलिस के हड़ताली कर्मचारियों को ‘बेकाबू भीड़’ बताते हुए उन पर ‘भद्दे’ नारे लगाने का आरोप लगाया और साथ ही पूरे मामले के राजनीति से प्रेरित होने का शक जताया। उन्होंने इसे आज़ाद भारत का सबसे काला दिन बताया है। काउन्सिल ने ‘दोषी’ पुलिस वालों के खिलाफ एक हफ्ते में गिरफ़्तारी और कार्रवाई न होने पर धरने पर बैठने की धमकी दी है।

इसके अलावा खबर यह भी आ रही है कि एक सुप्रीम कोर्ट वकील ने दिल्ली के कमिश्नर अमूल्य पटनायक को क़ानूनी नोटिस भेजा है क्योंकि उन्होंने आईटीओ स्थित पुलिस हेडक्वार्टर के सामने प्रदर्शन कर रहे पुलिस वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस जहाँ एक तरफ विरोध प्रदर्शन कर रही थी वहीं सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने इस मामले को लेकर बीजेपी पर हमला बोल दिया था। आम आदमी पार्टी ने कहा कि दिल्ली पुलिस ‘राजनीतिक इकाई’ में तब्दील हो गई है। यह बीजेपी की सशस्त्र शाखा की तरह काम कर रही है, जबकि इसका काम कानून-व्यवस्था बनाए रखने का है। वकीलों के समर्थन में आई आप ने दिल्ली पुलिस पर कई सवाल खड़े किए हैं।

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इसके अलावा आप के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने भी वकीलों का पक्ष लेते हुए पुलिस द्वारा की गई फायरिंग को बेवजह करार दिया था। उन्होंने यह बयान फायरिंग में घायल दो वकीलों को देखने अस्पताल पहुँचने पर दिया था।

पिछले हफ्ते के शनिवार (2 नवंबर, 2019 को) पार्किंग विवाद को लेकर दिल्ली के तीस हज़ारी कोर्ट के बाहर वकीलों और पुलिस के बीच हिंसा हुई थी। एक पुलिस कार और 20 अन्य वाहनों को आग लगा दी गई थी। 2 पुलिस वालों को दिल्ली हाई कोर्ट ने सस्पेंड कर दिया था और न्यायिक जाँच के आदेश दे दिए थे

इस मामले के खिलाफ कल दिल्ली के हज़ारों पुलिस वाले वर्दी उतार कर सादे कपड़ों में विरोध प्रदर्शन और हड़ताल भी किया था। इसके अलावा कई वर्तमान और भूतपूर्व अफसरों ने भी इसके खिलाफ ट्विटर पर आवाज़ उठाई थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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