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बंगाल: बीजेपी नेता की हत्या की सीआईडी करेगी जाँच, पुलिस स्टेशन के पास मनीष शुक्ला को मारी गई थी गोली

इसके अलावा पुलिस ने नेटीजन्स के लिए अप्रत्यक्ष चेतावनी भी जारी कि वह किसी भी तरह की गैर ज़िम्मेदार टिप्पणी न करें। ट्वीट में कहा है, “जाँच पूरी होने से पहले किसी भी नतीजे पर मत आइए। सोशल मीडिया में इस मामले पर किसी भी तरह की टिप्पणी करना जाँच में दखलंदाज़ी करने जैसा माना जाएगा। कृपया इससे बचने का प्रयास करें।”

भाजपा नेता मनीष शुक्ला की कथित तौर पर तृणमूल कॉन्ग्रेस के गुंडों द्वारा की गई हत्या के एक दिन बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने मामले की जाँच सीआईडी को सौंप दी है। इसके पहले मामले की जाँच बैरकपुर का पुलिस विभाग कर रहा था। भाजपा पार्षद व वकील मनीष शुक्ला की रविवार (अक्टूबर, 4 2020) को उत्तर परगना जिले में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। 

यह घटना बैरकपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले टीटागढ़ पुलिस स्टेशन के सामने हुई थी। घटना उस वक्त हुई जब वह एक कार्यक्रम में शामिल होने के बाद पार्टी कार्यालय गए थे। जैसे ही वह कार्यालय में दाखिल हुए वैसे ही बाइक सवार अपराधी आए और उन पर गोलीबारी कर दी। चश्मदीदों के मुताबिक़ उन्हें बहुत नज़दीक से गोली मारी गई थी।

इस बात की जानकारी सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने रोष जताया। संगठन का कहना था कि उन्हें तृणमूल सरकार के अंतर्गत काम करने वाली पुलिस पर भरोसा नहीं है। भाजपा की तरफ से इस मुद्दे पर असहमति का एक सबसे बड़ा कारण है, पिछले कुछ समय में वहाँ पार्टी के कई कार्यकर्ताओं की अप्राकृतिक मृत्यु हुई है जिसे राज्य की पुलिस ने आत्महत्या घोषित कर दिया या उस पर कोई नतीजा नहीं निकला। इन बातों को मद्देनज़र रखते हुए भाजपा ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग की है। 

भाजपा नेता की हत्या के बाद पैदा हुए जनता के आक्रोश और राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पश्चिम बंगाल की पुलिस ने ट्विटर पर सफाई पेश की। मामले में निजी दुश्मनी के पहलू पर जाँच करने का दावा करते हुए पश्चिम बंगाल पुलिस ने लिखा, “एक व्यक्ति को बैरकपुर स्थित टीटागढ़ क्षेत्र में शाम के वक्त गोली मार दी गई थी। पुलिस इस मामले में हर पहलू की जाँच कर रही है। जिसमें निजी दुश्मनी भी शामिल है, क्योंकि मृतक तमाम हत्या और हत्या के प्रयासों के मामले में आरोपित था।”

इसके अलावा पुलिस ने नेटीजन्स के लिए अप्रत्यक्ष चेतावनी भी जारी कि वह किसी भी तरह की गैर ज़िम्मेदार टिप्पणी न करें। ट्वीट में कहा है, “जाँच पूरी होने से पहले किसी भी नतीजे पर मत आइए। सोशल मीडिया में इस मामले पर किसी भी तरह की टिप्पणी करना जाँच में दखलंदाज़ी करने जैसा माना जाएगा। कृपया इससे बचने का प्रयास करें।”

पश्चिम बंगाल पुलिस विभाग द्वारा किया गया ट्वीट

सोमवार (5 अक्टूबर 2020) को भाजपा कार्यकर्ता नील रतन सरकार अस्पताल के सामने इकट्ठा हुए, जहाँ मृतक का शरीर रखा गया था। कार्यकर्ताओं का कहना था कि शरीर उनके हवाले किया जाए। पार्टी ने इस बात की जानकारी दी कि वह अपने कार्यकर्ता का शव कोलकाता से ले जाना चाहते थे।

पार्टी के वरिष्ठ नेता ने एबीपी न्यूज़ से बात करते हुए कहा, “पुलिस अधिकारी इस मामले में हमारा सहयोग नहीं कर रहे हैं। जब तक हमारी बात नहीं सुनी जाती हम यहाँ से हिलने वाले नहीं हैं। यह लोग (टीएमसी) मामले को दबाना चाहते हैं पर हमने अपना नेता खोया है। इसके पहले इन लोगों ने अर्जुन सिंह को निशाना बनाया था। जो भी टीएमसी का साथ छोड़ता है वह तुरंत इनके निशाने पर आ जाता है। यह लोग या तो उस नेता की हत्या करवा देते हैं या फिर उसके विरुद्ध झूठे मामले दर्ज करवाते हैं। पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नहीं रह गया है।”

पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं की माँगों को भी सिरे से खारिज कर दिया था। पुलिस ने अस्पताल के लगभग हर गेट पर बैरीकेडिंग लगा दी थी, सिर्फ एम्बुलेंस और मरीजों को भीतर दाखिल होने की अनुमति दी थी। रविवार की शाम भाजपा कार्यकर्ताओं ने 24 परगना को कोलकाता से जोड़ने वाली जीटी रोड को भी जाम कर दिया था। 

पश्चिम बंगाल में भाजपा नेताओं की हत्या, रहस्यमयी परिस्थितियों में मृत्यु अपने चरम पर है। राज्य में राजनीतिक हिंसा का इतिहास दशकों पुराना है। हाल ही में रॉबिन पॉल नाम के भाजपा कार्यकर्ता की कलन स्थित पथर घाटा गाँव में लिंचिंग कर दी गई थी। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पहले उसे टीएमसी समर्थकों ने बुरी तरह मारा और इसके बाद वह रॉबिन को दूसरे गाँव में लेकर गए, जहाँ टीएमसी के डिप्टी चीफ ने उसकी बुरी तरह पिटाई की। उसके परिवार वालों का आरोप था कि घटना के दौरान जब रॉबिन को उसकी बेटी ने पानी देने का प्रयास किया, तब टीएमसी के कार्यकर्ताओं ने उसे ऐसा करने से रोका। वह इतने पर ही रुके नहीं उन्होंने उसकी बेटी को धमकी भी दी।

13 जुलाई को पुलिस ने हेमताबाद से विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय का शव बरामद किया था। पुलिस ने भाजपा विधायक का शव राजीगंज की बिंदोल पंचायत स्थित बलिया गाँव से बरामद किया था। उनका शव दुकान की छत से लटका हुआ पाया गया था और वह पिछली रात से लापता थे। पुलिस ने इस मामले में लापरवाही भरे रवैये से काम किया था, जबकि भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना था कि विधायक देबेन्द्र नाथ रॉय की हत्या हुई है। 

इस मामले पर भाजपा अध्यक्ष (उत्तरी दिनाजपुर) का कहना था कि सुसाइड नोट कथित हत्यारे नेताओं को बचाने के लिए पुलिस द्वारा रचा गया षड्यंत्र है। उनका कहना था, “हम इस मामले में सीआईडी द्वारा की गई जाँच से संतुष्ट नहीं हैं और सीबीआई जाँच की ही माँग करते हैं।”     

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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