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Saturday, May 30, 2020
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गुलाम नबी ने खाली किया VVIP बंगला, अब अब्दुल्ला-महबूबा की बारी: सरकारी ख़र्चों पर भोग-विलास ख़त्म

गुलाम नबी आज़ाद नवंबर 2005 से लेकर जुलाई 2008 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे थे। हालाँकि, वह श्रीनगर में नहीं रहते थे, लेकिन तब भी उन्होंने गुपकार रोड के जीठयार स्थित जम्मू-कश्मीर बैंक गेस्टहाउस को सालों तक अपने कब्जे में रखा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश बनने से कई ऐसे नेताओं को निराशा हाथ लगी है, जो राज्य में किसी पद पर रहने के कारण मलाई मार रहे थे। इसमें एक नाम जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आज़ाद का भी है, जिन्हें श्रीनगर के वीवीआईपी इलाक़े में बंगला मिला हुआ था। उन्हें ये
बंगला मुफ्त में दिया गया था और उन्हें इसका किराया भी नहीं देना होता था। अगर जम्मू-कश्मीर के विशेष राज्य का दर्जा नहीं हटाया जाता तो ये सुविधाएँ सभी पूर्व-मुख्यमंत्रियों को आजीवन मिलतीं। अब गुलाम नबी आज़ाद को ये बंगला खाली करना पड़ा है।

गुलाम नबी आज़ाद नवंबर 2005 से लेकर जुलाई 2008 तक जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे थे। हालाँकि, वह श्रीनगर में नहीं रहते थे, लेकिन तब भी उन्होंने गुपकार रोड के जीठयार स्थित जम्मू-कश्मीर बैंक गेस्टहाउस को सालों तक अपने कब्जे में रखा। जम्मू-कश्मीर बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री ने गेस्ट हाउस खाली कर दिया है। लेकिन अभी तक प्रशासन की तरफ से ये संपत्ति बैंक को सुपुर्द नहीं की गई है। गुपकार रोड पर महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला के भी वीवीआईपी बंगले हैं। आज़ाद ‘अस्थायी निवास’ के नाम पर गेस्ट हाउस को ही अपना स्थायी बंगला बना कर रह रहे थे।

अब जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बन जाने और इसका विशेषाधिकार चले जाने के कारण महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्ला को भी अपने वीवीआईपी बंगले खली करने पड़ेंगे, जो उन्हें सरकार की तरफ से मिले थे। उन्हें इसके लिए 1 नवम्बर तक की समय-सीमा दी गई है। फ़िलहाल ये दोनों ही कश्मीरी नेता हिरासत में रखा गए हैं। ‘जम्मू कश्मीर स्टेट लेजिस्लेशन पेंशन एक्ट 1984’ के तहत इन नेताओं को ज़िंदगी भर सरकारी सुविधाओं का इस्तेमाल करने की छूट थी। इस एक्ट को 1996 में संशोधित कर कई और सुविधाएँ जोड़ी गई थीं, जिससे इन नेताओं पर और सरकारी रुपए ख़र्च होने लगे।

1 नवंबर को जम्मू-कश्मीर रीआर्गेनाईजेशन बिल के लागू होते ही इन कश्मीरी नेताओं को मिल रही सारी सरकारी सुख-सुविधाएँ अपने-आप हट जाएँगी। फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने किसी सरकारी संपत्ति पर आधिकारिक कब्ज़ा नहीं कर रखा है, लेकिन उनके बेटे उमर अब्दुल्ला के मामले में ऐसा नहीं है। हालाँकि, फ़ारूक़ अब्दुल्ला ट्रांसपोर्ट और मेडिकल जैसी कई अन्य सरकारी सुविधाओं का लाभ उठाते रहे हैं। उमर अब्दुल्ला के बंगले में तो अत्याधुनिक जिम सहित कई अन्य सुविधाओं पर करोड़ों ख़र्च किए गए हैं। इन सरकारी बंगलों की सजावट और अन्य निर्माण कार्यों में भी करोड़ों रुपए फूँके गए। इन ख़र्चों को राज्य सरकार ने वहन किया।

फ़िलहाल उमर अब्दुल्ला को श्रीनगर के हरि निवास में रखा गया है। मीडिया सूत्रों के अनुसार, वहाँ भी वो अपने मनपसंद पिज़्ज़ा, सलाद और घर के बने खाने की डिमांड करते हैं। उनके मनोरंजन के लिए हॉलीवुड फ़िल्मों की कई सीडी भी उपलब्ध कराई गई है।

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